नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) चीन की रिकॉर्ड व्यापार अधिशेष घोषणा के बाद कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए, बुधवार को बीजिंग के सामने ‘सुनियोजित तरीके से आत्मसमर्पण’ करने का आरोप लगाया। साथ ही सत्तारूढ़ पार्टी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेताओं के चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ ‘मेलजोल’ बढ़ाने की भी बात कही।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यह आश्चर्य की बात नहीं होगी कि 2025 में 1,200 अरब अमेरिकी डॉलर के कुल व्यापार अधिशेष में से 10 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत का है।
रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘चीन ने अभी घोषणा की है कि वर्ष 2025 में उसका व्यापार अधिशेष 1200 अरब डॉलर रहा। इसका अर्थ यह है कि अकेले भारत के साथ चीन का व्यापार अधिशेष कुल का लगभग 10 प्रतिशत था।’’
उन्होंने लिखा है, ‘‘हालांकि, यह कोई हैरानी की बात नहीं होनी चाहिए, क्योंकि हमने चीन के सामने सोच-समझकर समर्पण किया है। इसका ताजा उदाहरण ठीक एक दिन पहले सामने आया, जब भाजपा और आरएसएस के नेता, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मेल-जोल बढ़ाते नजर आए।
चीन सीमा शुल्क ने बुधवार को जारी वार्षिक व्यापार आंकड़ों में बताया कि चीन को होने वाले भारतीय निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में 5.5 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि इस अवधि में व्यापार घाटा 116.12 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
आंकड़ों के मुताबिक 2025 में द्विपक्षीय व्यापार भी 155.62 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।
चीन को होने वाला भारतीय निर्यात पिछले साल जनवरी से दिसंबर के बीच 9.7 प्रतिशत बढ़कर 19.75 अरब डॉलर हो गया।
सीपीसी के विदेश विभाग के उप मंत्री सुन हैयान के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को भाजपा मुख्यालय का दौरा किया और सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं से बातचीत की। चीनी प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले से मुलाकात की।
सीपीसी प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को यहां कांग्रेस के विदेश मामलों के विभाग के प्रमुख सलमान खुर्शीद से भी मुलाकात की, विपक्षी दल ने दावा किया कि यह बैठक प्रतिनिधिमंडल के अनुरोध पर और सरकार की मंजूरी से हुई।
सीपीसी के प्रतिनिधिमंडल की बैठकों से एक राजनीतिक विवाद उपजा है, जिसमें कांग्रेस ने पूछा कि क्या भाजपा ने आगंतुकों के साथ अपनी बातचीत के दौरान बार-बार होने वाले चीनी अतिक्रमणों का मुद्दा उठाया। इस पर सत्तारूढ़ पार्टी ने पलटवार करते हुए कहा कि वह खुले तौर पर काम करती है और ‘गोपनीय रूप से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर नहीं करती’।
भाषा यासिर नरेश रमण
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