ढाका के रास्ते अगरतला-कोलकाता बस सेवा बहाल करने को परीक्षण शुरू; मणिक साहा ने किया पहल का स्वागत

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ढाका के रास्ते अगरतला-कोलकाता बस सेवा बहाल करने को परीक्षण शुरू; मणिक साहा ने किया पहल का स्वागत

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  • Publish Date - February 21, 2026 / 09:47 PM IST,
    Updated On - February 21, 2026 / 09:47 PM IST

अगरतला, 21 फरवरी (भाषा) बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बाद एक साल से निलंबित अगरतला को ढाका के रास्ते कोलकाता से जोड़ने वाली भारत-बांग्लादेश बस सेवा के संचालक ने सेवा को बहाल करने के मकसद से शनिवार को एक परीक्षण शुरू किया। यहां एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मणिक साहा ने भारत-बांग्लादेश बस सेवा को फिर से शुरू करने की पहल का स्वागत किया।

बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के कारण ‘रॉयल-मैत्री अंतरराष्ट्रीय बस सेवा’ पिछले एक साल से निलंबित है, जिससे वीजा संबंधी समस्याएं उत्पन्न हुईं और यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट आई है। स्थिति में सुधार होने के साथ, बस संचालक अब सेवा को पुनः शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं और इसके लिये परीक्षण शुरू किया है।

अंतरराष्ट्रीय बस सेवा संचालक के प्रबंधक मनोरंजन देवनाथ से यह पूछे जाने पर कि क्या उनके पास सेवा फिर से शुरू करने का अधिकार है, उन्होंने कहा कि अनुमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि भारत और बांग्लादेश के बीच 2001 में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय समझौता रद्द नहीं किया गया है।

मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा, “बांग्लादेश में निर्वाचित सरकार के गठन के साथ ही अनिश्चितता समाप्त हो गई है। यह द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक अच्छा संकेत है। हमें उम्मीद है कि अन्य मुद्दों का भी समाधान हो जाएगा,” साहा ने पत्रकारों से कहा।

देवनाथ ने बताया कि भारत-बांग्लादेश बस सेवा के निलंबन के एक साल बाद संचालक ने सेवा को फिर से शुरू करने के लिए ढाका से पश्चिम त्रिपुरा के कृष्णानगर डिपो में एक बस मंगवाई।

उन्होंने कहा, “आज परीक्षण के तौर पर बस कृष्णानगर बस डिपो (अगरतला) से ढाका के लिए रवाना हुई। यह दो-तीन दिन तक जारी रहेगा। एक बार व्यवस्था स्थिर हो जाने पर हम सप्ताह में तीन बार बस सेवा को फिर से शुरू करेंगे।”

अगरतला से ढाका होते हुए कोलकाता तक की लगभग 500 किलोमीटर की यात्रा का किराया 2800 रुपये है। अगरतला से ट्रेन को गुवाहाटी होते हुए कोलकाता पहुंचने में 1567 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।

भाषा यासिर माधव रंजन

रंजन