कोलकाता, 15 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख एवं पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले विधायक मदन मित्रा बुधवार को नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट में शामिल हो गए।
विधायक ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी थी।
कामरहाटी से विधायक मित्रा ने घोषणा की कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की सभी राष्ट्रीय और संगठनात्मक समितियों से इस्तीफा दे रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से भी तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है।
इस घटनाक्रम को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जो बीते कुछ महीने से अभूतपूर्व बगावत का सामना कर रहा है।
मित्रा ने बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘मैंने अपना कमरा बदला है, मकान नहीं। मैं तृणमूल कांग्रेस का ही हिस्सा हूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘शायद उस कमरे में आरामदायक बिस्तर था, जबकि इस कमरे में केवल एक चारपाई है। मैंने चारपाई को चुना है।’’
उन्होंने घोषणा की कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट में अब कोई संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे, हालांकि वह तृणमूल कांग्रेस के विधायक बने रहेंगे।
पिछले कुछ महीनों से ऋतब्रत बनर्जी गुट ने पूर्व मुख्यमंत्री के नेतृत्व को लगातार चुनौती दी है।
मित्रा ने कहा कि गुट बदलने से पहले उन्होंने अपने फैसले के बारे में ममता बनर्जी को सूचित कर दिया था।
मित्रा ने कहा, ‘‘मैंने उन्हें (ममता बनर्जी) एक व्हाट्सऐप संदेश भेजा, जिसमें लिखा था ‘सॉरी’। वह वर्षों तक हमारे साथ खड़ी रहीं और हमने भी अपने तरीके से योगदान देने की कोशिश की। उन्होंने जो कुछ भी किया है, उसके लिए मैं उनका धन्यवाद करता हूं। लेकिन उन्हें यह तय करना होगा कि वह जनहित की राजनीति को आगे बढ़ाना चाहती हैं या अपने भतीजे (अभिषेक बनर्जी) के इर्द-गिर्द केंद्रित वंशवादी राजनीति को।’’
मित्रा ने यह भी घोषणा की कि वह 21 जुलाई को ऋतब्रत बनर्जी गुट द्वारा आयोजित किए जा रहे शहीद दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे।
बागी नेताओं ने एक समानांतर संगठनात्मक ढांचे की घोषणा की है और पार्टी मुख्यालय पर अपना नियंत्रण होने का दावा किया है जबकि ममता बनर्जी गुट ने इन दावों को खारिज कर दिया है।
मित्रा के इस कदम को लेकर अटकलें मंगलवार रात से ही तेज हो गई थीं, जब उन्होंने बागी विधायक संदीपन साहा के आवास का दौरा किया था।
मित्रा ने इस बात को खारिज किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के कारण उन्होंने गुट बदला। उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधा और तृणमूल कांग्रेस के पतन के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा, ‘‘अभिषेक ईडी से भी ज्यादा डरावने हैं। मेरे फैसले का मुख्य कारण अभिषेक हैं। मैं पार्टी में घुटन महसूस कर रहा था। तृणमूल अपने कार्यकर्ताओं की पार्टी है, किसी एक व्यक्ति की नहीं। इसे हिटलर की तरह तानाशाही तरीके से नहीं चलाया जा सकता। नेताओं को जनता के बीच जाना चाहिए।’’
शुरुआत में अभिषेक का नाम लिए बिना, मित्रा ने कहा कि इतिहास में यह दर्ज होगा कि ‘‘एक व्यक्ति’’ ने उस पार्टी को नष्ट कर दिया था, जिसने कभी 213 विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी।
इस बीच तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से नेताओं के परिवारों को निशाना बनाकर उन्हें गुट बदलने के लिए मजबूर करने की कोशिश की जा रही है।
घोष ने कहा, ‘‘भले ही मदन दा वहां चले जाएं, लेकिन उनका दिल ममता दी के साथ ही रहेगा।’’
उद्योग मंत्री एवं भाजपा नेता तापस रॉय ने कहा कि ये घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के भीतर लगातार जारी उथल-पुथल को दर्शाते हैं।
भाषा
देवेंद्र अविनाश
अविनाश