मालदा न्यायिक अधिकारियों के घेराव की योजना तृणमूल कांग्रेस ने बनाई: शुभेंदु अधिकारी

मालदा न्यायिक अधिकारियों के घेराव की योजना तृणमूल कांग्रेस ने बनाई: शुभेंदु अधिकारी

मालदा न्यायिक अधिकारियों के घेराव की योजना तृणमूल कांग्रेस ने बनाई: शुभेंदु अधिकारी
Modified Date: April 2, 2026 / 08:02 pm IST
Published Date: April 2, 2026 8:02 pm IST

कोलकाता, दो अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता शुभेंदु अधिकारी ने बृहस्पतिर को आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कवायद के दौरान मालदा के सुजापुर में न्यायिक अधिकारियों का घेराव और हिंसा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस द्वारा ‘‘सुनियोजित तरीके से की गयी।’’

अधिकारी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दावा किया कि मालदा में एसआईआर कवायद में लगे न्यायिक अधिकारियों का घेराव ‘ममता बनर्जी के नेतृत्व में कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष स्तर’ द्वारा सुनियोजित था, जिसमें स्थानीय नेता सबीना यास्मीन ने जमीनी स्तर पर योजना को अंजाम दिया था।

मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने एसआईआर कवायद में शामिल सात न्यायिक अधिकारियों का बुधवार को मालदा जिले में कई घंटे तक घेराव किया था, जिसके बाद देर रात सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग करके भीड़ को खदेड़ कर उन्हें बचाया।

अधिकारी ने विशेष रूप से यास्मीन को जिला स्तर पर कथित योजना के ‘क्रिर्यान्वयन की मुख्य सूत्रधार’ करार दिया।

इससे पहले, बनर्जी ने न्यायिक अधिकारियों की ‘सुरक्षा करने में विफल’ होने के लिए निर्वाचन आयोग को दोषी ठहराया था और आरोप लगाया था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्य के नागरिक और पुलिस प्रशासन में बदलाव करवा रहे हैं।

उन्होंने कहा था, ‘‘यह सब शाह की साजिश है, मैं उनके इस्तीफे की मांग करती हूं।’’

अधिकारी ने शाह की उपस्थिति में आयोजित अपने नामांकन जुलूस के दौरान उचित सम्मान नहीं दिखाने के लिए कोलकाता पुलिस के कालीघाट डिवीजन के प्रभारी अधिकारी और उपायुक्त के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की।

शुभेंदु अधिकारी के अनुसार, अधिकारियों का व्यवहार “प्रशासनिक पक्षपात” दर्शाता है और उन्होंने निर्वाचन आयोग से उनके खिलाफ उचित कार्रवाई शुरू करने का आग्रह किया।

उन्होंने मांग की कि कालीचक पुलिस थाना मालदा घटना से संबंधित सभी मामले के दस्तावेज आधी रात तक राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दे, क्योंकि सबूतों से छेड़छाड़ का खतरा है।

आरजी कर अस्पताल मामले से तुलना करते हुए, अधिकारी ने आरोप लगाया कि उस मामले में पांच दिनों के भीतर सबूत नष्ट कर दिए गए थे और न्यायिक अधिकारियों के घेराव में भी ऐसी ही आशंका की चेतावनी दी।

अधिकारी ने राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर राजनीतिक विरोधियों को डराने के लिए ‘मध्ययुगीन बर्बरता’ और सामाजिक बहिष्कार का सहारा लेने का आरोप लगाया। उन्होंने नंदीग्राम की एक कथित घटना का हवाला दिया, जहां भाजपा समर्थक को मस्जिद में प्रवेश करने से रोकने और सरकारी वित्त पोषित पानी के नल का उपयोग करने से वंचित करने का फतवा जारी किया गया था।

भाषा अमित नरेश

नरेश


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