तृणमूल ने एसआईआर के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया, अध्यक्ष ने चर्चा की अनुमति नहीं दी

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तृणमूल ने एसआईआर के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया, अध्यक्ष ने चर्चा की अनुमति नहीं दी

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  • Publish Date - February 5, 2026 / 03:53 PM IST,
    Updated On - February 5, 2026 / 03:53 PM IST

कोलकाता, पांच फरवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर प्रस्तावित चर्चा को लेकर बृहस्पतिवार को तीखी राजनीतिक खींचतान देखने को मिली, हालांकि विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित रहने के कारण इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति नहीं दी।

सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने एसआईआर की प्रक्रिया पर चर्चा का अनुरोध किया था और यह तर्क दिया था कि इसके (एसआईआर के) कारण 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं को व्यापक स्तर पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि, अध्यक्ष ने कहा कि सदन इस मुद्दे पर विचार नहीं करेगा, क्योंकि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और चर्चा राज्यपाल के संबोधन तक ही सीमित रहेगी।

इसी बीच, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सरकार पर अंतिम समय में कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) के प्रस्ताव को बदलने का आरोप लगाया।

अधिकारी ने कहा, ‘‘बीएसी का प्रस्ताव सुबह बताया गया था, लेकिन उसमें बदलाव कर दिया गया है। हमें बताया गया था कि एसआईआर पर चर्चा होगी और हम तैयारी के साथ आए थे। अब इसमें बदलाव किया जा रहा है।’’

अधिकारी ने फिर अध्यक्ष से सदन के समक्ष कार्यसूची रखने का अनुरोध किया।

इससे पूर्व राज्य के संसदीय कार्य मंत्री शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने एसआईआर प्रक्रिया पर चर्चा की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पढ़ा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।

नियम 169 के तहत प्रस्ताव पेश करते हुए चट्टोपाध्याय ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया से मतदाताओं को परेशान किया गया और मानसिक तनाव के कारण 107 लोगों की मौत हो गई।

निर्वाचन आयोग की आलोचना करते हुए उन्होंने दावा किया कि राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ‘‘परेशान करने का आयोग’’ बन गया है।’’

अध्यक्ष ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामला अभी उच्चतम न्यायालय में लंबित है, इसलिए सदन इसपर विचार-विमर्श नहीं कर सकती।

विधानसभा चुनाव में तीन महीने से भी कम समय बचा है, ऐसे में एसआईआर मुद्दा सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच एक प्रमुख विवाद का मुद्दा बनकर उभरा है, जिससे सदन के अंदर राजनीतिक विभाजन और भी गहरा गया है।

भाषा सुरभि सुरेश

सुरेश