Supreme Court on Contractual Employees: संविदा कर्मचारियों के हित में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सैलरी डबल करने के साथ ही नियमितीकरण करने का दिया आदेश

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Supreme Court on Contractual Employees: संविदा कर्मचारियों के हित में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सैलरी डबल करने के साथ ही नियमितीकरण करने का दिया आदेश

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  • Publish Date - February 5, 2026 / 04:41 PM IST,
    Updated On - February 5, 2026 / 04:41 PM IST

Supreme Court on Contractual Employees: संविदा कर्मचारियों के हित में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सैलरी डबल करने के साथ ही नियमितीकरण करने का दिया आदेश / Image: IBC24 Customized

HIGHLIGHTS
  • संविदा शिक्षकों का मानदेय ₹7,000 से बढ़ाकर ₹17,000 प्रति माह करने का आदेश
  • कोर्ट ने वर्ष 2017-18 से अब तक के वेतन अंतर (Difference) का भुगतान करने को कहा
  • जो कर्मचारी 10 साल से अधिक सेवा दे चुके हैं, उन्हें स्थायी माना जाए

नई दिल्ली: Supreme Court on Contractual Employees सुप्रीम कोर्ट ने संविदा कर्मचारियों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है, जो उनके लिए ना सिर्फ उनके लिए खुशखबरी है बल्कि एक बड़ी राहत भी है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने संविदा कर्मचारियों की सैलरी डबल करने का आदेश दिया है। साथ ही ये भी कहा है कि जो कर्मचारी 10 साल से अधिक समय से सेवा दे रहे हैं उन्हें स्थायी माना जाए। वहीं, कोर्ट ने 9 साल के बकाए सैलरी का भी भुगतान करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद संविदा कर्मचारियों में खुशी की लहर है।

संविदा कर्मचारियों की सैलरी डबल

Supreme Court on Contractual Employees दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संविदा शिक्षकों का वेतन सात हजार से 17 हज़ार रुपए करने का फैसला किया है। बताया गया कि प्रदेश के संविदा शिक्षकों को अब तक मासिक वेतन के तौर पर 7000 रुपए का भुगतान किया जाता है। कर्मचारियों की मानें तो ऐसा पिछले 2017 से चलते आ रहा है। कोर्ट ने कहा है कि संविदा कर्मचारियों को 2017 से अब तक के वेतन का अंतर का भुगतान भी राज्य सरकार को करना होगा। 2017 से अभी तक की सैलरी का अंतर मिलता है तो कर्मचारियों को करीब 100 महीने की सैलरी एक साथ मिलेगी।

10 साल सेवा दे चुके कर्मचारी स्थायी माने जाएंगे

कोर्ट ने आदेश दिया है कि बकाया सैलरी का भुगतान भी 6 महीने में किया जाए। इस हिसाब से सैलरी में जो 10 हजार रुपए का फायदा हुआ है, उसका 100 महीनों का भुगतान भी अब करना होगा। अगर कोई कर्मचारी 2017 से संविदा शिक्षक के रुप में काम कर रहा है तो उसे 100 महीनों के करीब 10 लाख रुपये एक्स्ट्रा भी मिलेंगे। कोर्ट ने 7 हजार रुपए पर लंबे समय तक काम कराने को बेगार यानी बंधुआ मजदूरी जैसा बताते हुए शिक्षकों के हक में बड़ा फैसला सुनाया। जस्टिस पंकज मित्थल और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि एक दशक से भी अधिक समय से इन अनुबंधित शिक्षकों को मात्र सात हजार रुपए वेतन दिया जा रहा है। यह सर्वथा अनुचित और बंधुआ मजदूरी या बेगार जैसा है।

संविदा कर्मचारियों के आर्थिक लाभ का गणित

विवरण गणना (Calculation)
पुराना वेतन ₹7,000
नया स्वीकृत वेतन ₹17,000
प्रति माह का अंतर ₹10,000
बकाया अवधि (लगभग) 100 महीने (2017 से)
अनुमानित एकमुश्त भुगतान ₹10,00,000 (10 लाख रुपये)

बकाया वेतन का होगा भुगतान

साथ ही कोर्ट ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत यह पूरी तरह से प्रतिबंधित है। कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए कहा कि संविदा शिक्षकों को वर्ष 2017-18 से 17 हजार रुपए मासिक मानदेय का अधिकार है। अदालत ने कहा कि 11 महीने के अनुबंध के नाम पर साल दर साल काम लेते रहना और वेतन न बढ़ाना गलत है। पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य सरकार 1 अप्रैल 2026 से 17 हजार रुपए प्रतिमाह के हिसाब से भुगतान शुरू करें। साथ ही बकाया राशि छह महीने के भीतर चुकाई जाए।

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यह फैसला किन कर्मचारियों पर लागू होगा?

यह फैसला मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के उन संविदा शिक्षकों पर लागू होगा जो लंबे समय से ₹7,000 के मानदेय पर काम कर रहे थे, विशेषकर वे जो 11 महीने के अनुबंध पर बार-बार नियुक्त किए जाते थे।

10 साल की सेवा वालों के लिए 'स्थायी' होने का क्या मतलब है?

कोर्ट का आशय है कि 10 साल की निरंतर सेवा के बाद उन्हें केवल 'अनुबंधित' (Contractual) मानकर हटाया नहीं जा सकता और वे नियमित कर्मचारियों की भांति लाभ के हकदार होने चाहिए।

सरकार को कुल कितना भुगतान करना होगा?

हजारों शिक्षकों के 10-10 लाख रुपये के बकाये को देखते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार पर कई सौ करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।

क्या यह आदेश तत्काल प्रभावी है?

नया वेतन 1 अप्रैल 2026 से मिलना शुरू होगा, जबकि पिछले बकाये के लिए सरकार को 6 महीने का समय दिया गया है।

कोर्ट ने 11 महीने के कॉन्ट्रैक्ट पर क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि "11 महीने के अनुबंध" का नाम देकर साल-दर-साल काम लेना और वेतन न बढ़ाना एक शोषणकारी प्रक्रिया है, जिसे अब स्वीकार नहीं किया जाएगा।