तृणमूल सांसद हक की कंपनी ने ‘संदिग्ध’ स्रोतों से बिटकॉइन का लेन-देन किया: ईडी

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तृणमूल सांसद हक की कंपनी ने 'संदिग्ध' स्रोतों से बिटकॉइन का लेन-देन किया: ईडी

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  • Publish Date - September 9, 2026 / 08:36 PM IST,
    Updated On - September 9, 2026 / 08:36 PM IST

नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सांसद नदीमुल हक द्वारा प्रवर्तित की गई एक उर्दू दैनिक अखबार की प्रकाशन कंपनी के बैंक खातों की जांच में ‘‘संदिग्ध’’ स्रोतों से बिटकॉइन लेन-देन का पता चला, जिनका कोई व्यावसायिक आधार नहीं था।

ईडी ने कहा कि सात सितंबर को कंपनी ‘अखबार-ए-मशरिक प्राइवेट लिमिटेड’, हक और अन्य लोगों के खिलाफ शुरू की गई तीन दिन की तलाशी के दौरान कंपनी के बैंक खातों से लेन-देन पर रोक लगा दी गई, जिनमें 5.25 करोड़ रुपये जमा थे।

यह कंपनी दैनिक समाचार पत्र ‘अखबार-ए-मशरिक’ की प्रकाशक है। वहीं, हक ‘अखबार-ए-मशरिक प्राइवेट लिमिटेड’ के निदेशक हैं, जो यह अखबार प्रकाशित करती है।

ईडी ने कहा कि कंपनी के चार सरकारी और निजी बैंकों में खाते हैं, जिनमें कुल मिलाकर 60 करोड़ रुपये से अधिक नकदी जमा है।

एजेंसी ने बताया कि कंपनी ने तीन ऐसे बैंक खाते बंद कर दिए थे, जिनमें 5.60 करोड़ रुपये नकदी जमा की गई थी।

ईडी का दावा है कि खातों की जांच से पता चला कि बिटकॉइन खरीदने के लेन-देन संदिग्ध स्रोतों से हुए थे और इनके पीछे कोई स्पष्ट व्यावसायिक कारण नहीं था।

एजेंसी ने आरोप लगाया कि कंपनी ने अपने अखबार की छपी हुई प्रतियों की संख्या को ‘‘बढ़ा-चढ़ाकर’’ दिखाया, ताकि इनके आंकड़ों को ‘‘गलत तरीके से पेश’’ किया जा सके और इस तरह विज्ञापन से अधिक कमाई की जा सके।

तृणमूल कांग्रेस ने पूर्व में अपने सांसद के खिलाफ लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ईडी की कार्रवाई ‘‘ऑपरेशन लोटस 2.0’’ का हिस्सा है, जिसका मकसद पार्टी के उन सांसदों पर दबाव बनाना है जो पाला नहीं बदल रहे हैं। हक (56) तृणमूल के ममता बनर्जी नीत गुट में हैं।

ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कोलकाता, रांची और दिल्ली में कंपनी, उससे संबंध रखने वाली संस्थाओं और निदेशकों से जुड़ी कुल नौ जगहों पर छापेमारी की। इसके अलावा, ‘क्रेयॉन्स एडवरटाइजिंग’ और ‘मशरिक मीडिया’ नाम की कंपनियों और हक के घर पर भी छापेमारी की गई।

एजेंसी ने एक बयान में कहा, ‘‘ईडी की जांच बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय द्वारा अखबार-ए-मशरिक प्राइवेट लिमिटेड (उर्दू दैनिक ‘अखबार-ए-मशरिक’ के प्रकाशक) और अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी। आरोप है कि उन्होंने अपने अखबार और सोशल मीडिया/डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने वाली सामग्री प्रकाशित और प्रसारित की, साथ ही उनके खातों में संदिग्ध लेनदेन के आरोप भी थे।’’

ईडी ने दावा किया कि जांच से पता चला है कि अखबार का स्वामित्व रखने वाली कंपनी के पास ‘‘कर्नाटक बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और जम्मू एंड कश्मीर बैंक में कई खाते थे, जिनमें कुल मिलाकर 60 करोड़ रुपये से ज़्यादा नकदी जमा थी।’’

एक ओर जहां तृणमूल ने इन छापों को भाजपा की ‘‘प्रतिशोध की राजनीति’’ और ‘‘दिल्ली में इमारत गिरने की घटना से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश’’ बताया, वहीं पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी (भाजपा) ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए इसे एक वैध जांच का हिस्सा बताया।

भाषा सुभाष माधव

माधव