त्रिपुरा विधानसभा ने नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के समर्थन में संकल्प पारित किया

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त्रिपुरा विधानसभा ने नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के समर्थन में संकल्प पारित किया

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  • Publish Date - April 30, 2026 / 09:34 PM IST,
    Updated On - April 30, 2026 / 09:34 PM IST

अगरतला, 30 अप्रैल (भाषा) त्रिपुरा विधानसभा ने नारी शक्ति वंदन (संशोधन) विधेयक को संसद में पुनः प्रस्तुत करने और लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं के लिए 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया के साथ इसे लागू करने की मांग वाला संकल्प बृहस्पतिवार को पारित कर दिया।

हालांकि, विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के सदस्यों ने इसका विरोध किया।

लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने संबंधी विधेयक को हाल में संसद में पेश किया गया था, लेकिन यह पारित नहीं हो सका था।

चर्चा में भाग लेते हुए विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी ने कहा कि विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित होने पर भी इस संकल्प के प्रभाव को लेकर वे अनिश्चित हैं।

उन्होंने कहा, “संसद में दो-तिहाई सांसदों के समर्थन के अभाव में 131वां संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। इसलिए, मुझे नहीं पता कि विधानसभा में संकल्प सर्वसम्मति से पारित होने पर इसका क्या प्रभाव होगा।”

यह दावा करते हुए कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) हमेशा से विधानसभाओं में महिलाओं के सशक्तीकरण के पक्षधर रही है, चौधरी ने कहा कि पार्टी लोकसभा और विधानसभाओं की वर्तमान सीटों के आधार पर महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण चाहती है, न कि परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित प्रारूप के आधार पर।

कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने केंद्र सरकार के इरादे पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सितंबर 2023 में संसद में पारित होने के बावजूद महिला आरक्षण लागू क्यों नहीं किया गया।

उन्होंने कहा, “अगर भाजपा का इरादा नेक था, तो नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू क्यों नहीं किया गया? यह मोदी सरकार द्वारा विपक्ष विरोधी भावना पैदा करने का एक राजनीतिक हथकंडा था।”

हालांकि, मुख्यमंत्री माणिक साहा ने संकल्प का समर्थन करते हुए विपक्ष पर इसका विरोध करके विधानसभाओं में महिलाओं के अधिकारों से वंचित करने का आरोप लगाया।

माकपा और कांग्रेस के विरोध के बावजूद, पेश किया गया संकल्प विधानसभा में ध्वनिमत से पारित हो गया।

भाजपा की सहयोगी टिपरा मोथा पार्टी और त्रिपुरा आदिवासी मोर्चा ने भी इसका समर्थन किया।

भाषा

राखी सुभाष

सुभाष