नौगांव (असम), 20 अप्रैल (भाषा) नौगांव की एक अदालत ने आठ साल पहले भीड़ द्वारा दो व्यक्तियों को बच्चा चोर होने के संदेह में पीटकर मार डालने के मामले में 20 लोगों को सोमवार को दोषी ठहराया और मामले में आरोपी 25 अन्य को बरी कर दिया।
नौगांव जिला सत्र न्यायाधीश डी. जे. महंत ने इस मामले में 45 आरोपियों में से 20 को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया। इनमें गैरकानूनी सभा के एक या अधिक सदस्यों द्वारा की गई हत्या, दंगा, लोक सेवक को उनके आधिकारिक कर्तव्य का पालन करने से रोकना और स्वेच्छा से चोट पहुंचाना शामिल है।
अदालत ने यह भी फैसला सुनाया कि अभियोजन पक्ष इस मामले में गिरफ्तार किए गए 25 अन्य लोगों के खिलाफ अपना मामला साबित करने में विफल रहा है, जो वर्तमान में जेल में बंद हैं। आरोपियों को सजा 24 अप्रैल को सुनाई जाएगी।
न्यायाधीश ने नौगांव केंद्रीय जेल के अधीक्षक को बरी किए गए व्यक्तियों को रिहा करने का निर्देश दिया, जबकि आरोपियों को उनके वकीलों के साथ 24 अप्रैल को सजा सुनाए जाने के लिए अदालत में उपस्थित रहना होगा।
इस मामले में कुल 48 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन तीन अन्य आरोपी नाबालिग थे और उन्हें वर्तमान में जोरहाट किशोर सुधार गृह में रखा गया है।
निलोत्पल दास (29) और अभिजीत नाथ (30) नाम के दो व्यक्ति 8 जून, 2018 को कार्बी आंगलोंग के डोकमोका पुलिस थानाक्षेत्र अंतर्गत कांगथिलांगसो पिकनिक स्थल गए थे। वापसी में, गुस्साये ग्रामीणों के एक समूह ने पंजुरी में उनके वाहन को रोक लिया, उन्हें बाहर खींचा और उनकी पिटाई शुरू कर दी।
सोशल मीडिया पर सामने आये एक वीडियो में दास और नाथ दोनों यह गुहार लगाते सुने जा सकते हैं कि वे बच्चा चोर नहीं हैं, बल्कि असम के युवक हैं जो कार्बी आंगलोंग घूमने आए थे।
मुंबई में रहने वाले साउंड इंजीनियर दास, छुट्टियां मनाने असम आए थे और व्यवसायी नाथ के साथ कार्बी आंगलोंग में प्रकृति की आवाजें रिकॉर्ड करने और कुछ दर्शनीय स्थलों को देखने गए थे।
पुलिस दोनों को अस्पताल ले गई, लेकिन रास्ते में ही दोनों की मौत हो गई।
दोनों युवकों के पिता गोपाल चंद्र दास और अजीत कुमार नाथ सोमवार को अदालत में मौजूद थे और उन्होंने मीडियाकर्मियों से कहा कि वे 25 लोगों के बरी होने से असंतुष्ट हैं और इस फैसले के खिलाफ गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।
भाषा
अमित प्रशांत
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