नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने आरटीआई आवेदन को सही तरीके से नहीं निपटाने और वैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करने पर रेलवे के दो अधिकारियों पर कुल 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
सीआईसी ने साथ ही आरटीआई आवेदन से जुड़े मामले में तत्कालीन प्रथम अपीलीय प्राधिकारी को जारी की गई चेतावनी को उनके सेवा रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्देश दिया। आयोग ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
दोनों अधिकारियों ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 की धारा 2(एफ) के दायरे से बाहर बताते हुए आरटीआई आवेदन खारिज कर दिया था।
आयोग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 20(1) के तहत दक्षिण रेलवे के मौजूदा केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) पर 15 हजार रुपये और तत्कालीन सीपीआईओ पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
आरटीआई आवेदक ने अपने खिलाफ जारी आरोप पत्र से जुड़ी पूरी फाइल मांगी थी जिसमें पत्राचार, टिप्पणियों के अलावा अपनी पुनरीक्षण याचिका तथा उसे जल्द निपटाने के अनुरोध पर की गई कार्रवाई का विवरण भी शामिल था।
सीआईसी ने कहा कि मांगी गई सूचना ‘उसकी अपनी अनुशासनात्मक कार्यवाही और पुनरीक्षण याचिका से संबंधित है’ और यह काफी हद तक उस सूचना से जुड़ी है जो लोक प्राधिकरण के पास उपलब्ध है या उसके नियंत्रण में है।
आयोग ने कहा कि ऐसी सूचनाओं के अनुरोध को आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 2(एफ) का हवाला देकर सीधे खारिज नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान मौजूदा सीपीआईओ यह बताने में विफल रहे कि मांगी गई सूचना को धारा 2(एफ) के दायरे से बाहर क्यों माना गया। आयोग ने कहा कि अधिकारी शिकायतकर्ता के दो आरटीआई आवेदनों को आपस में मिला रहे थे।
सीआईसी ने यह भी कहा कि हालांकि सीपीआईओ ने दावा किया था कि आरोप पत्र से संबंधित दस्तावेज पहले ही उपलब्ध करा दिए गए थे, लेकिन रिकॉर्ड में इसके समर्थन में कोई दस्तावेजी प्रमाण, भेजे जाने की पुष्टि या प्राप्ति रसीद पेश नहीं की गई।
आयोग ने कहा, ‘सुनवाई के दौरान दिए गए केवल मौखिक दावों को बिना किसी दस्तावेजी प्रमाण के आरटीआई अधिनियम के अनुपालन का सबूत नहीं माना जा सकता।’
सीआईसी ने धारा 2(एफ) के दायरे को दोहराते हुए कहा कि मौजूदा रिकॉर्ड, पत्राचार, फाइल पर टिप्पणी, तारीखों और की गई कार्रवाई से संबंधित रिकॉर्ड की प्रतियां सूचना की परिभाषा में आती हैं।
सीआईसी ने आरटीआई आवेदन के निपटारे में ‘गंभीर प्रक्रियात्मक और वास्तविक खामियां’ पाईं और कहा कि मौजूदा सीपीआईओ का रवैया आरटीआई अधिनियम तथा आयोग की कार्यवाही के प्रति ‘लापरवाही भरा’’ है।
दोनों अधिकारियों से जुर्माने की राशि उनके वेतन से वसूली जाएगी। आयोग ने सलेम के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) को आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
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