तिरुवनंतपुरम, आठ जून (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने केरल सरकार पर केंद्र की ‘पीएम श्री’ योजना को लेकर ‘‘गलत जानकारी’’ फैलाने का आरोप लगाते हुए सोमवार को तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) इस परियोजना को लागू करने की कोशिश कर रहा है, जबकि पहले उसने इसका विरोध किया था।
शिवनकुट्टी ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि जब वामपंथी सत्ता में थे, तब राज्य को पीएम श्री (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) योजना के तहत कोई धनराशि प्राप्त नहीं हुई थी, क्योंकि केरल में इसका कार्यान्वयन कभी शुरू ही नहीं हुआ था।
उन्होंने कहा, ‘‘राज्य के सामान्य शिक्षा मंत्री का यह दावा कि केरल को ‘पीएम श्री’ योजना के तहत धनराशि मिली है, सरासर झूठ है। केरल ने न तो यह योजना शुरू की है और न ही इसके लिए एक रुपया भी प्राप्त किया है।’’
शिवनकुट्टी की यह प्रतिक्रिया वर्तमान सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन के उस बयान के कुछ दिनों बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वर्तमान सरकार पिछली सरकार के काम को ही जारी रख रही है, जिसने केंद्र के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और योजना के तहत धनराशि प्राप्त की थी।
सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल आईयूएमएल नेता शम्सुद्दीन ने कहा, ‘‘पिछली सरकार ने समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और धनराशि स्वीकार की थी। इसलिए, अंतिम निर्णय लेने से पहले हम रिपोर्ट की जांच करेंगे।’’
शिवनकुट्टी ने योजना लागू करने की प्रक्रिया समझाते हुए कहा कि इसमें एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करना, निर्दिष्ट पोर्टल के माध्यम से पात्र स्कूलों की पहचान करना और धन प्राप्त करने से पहले अनुमोदन के लिए चयनित स्कूलों की सूची केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को प्रस्तुत करना शामिल है।
उनके अनुसार, पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार ने समझौता ज्ञापन पर उस वक्त हस्ताक्षर किए थे, जब केंद्र ने कथित तौर पर समग्र शिक्षा केरल (एसएसके) कार्यक्रम के तहत धन जारी करने को पीएम श्री में भागीदारी से जोड़ दिया था।
उन्होंने कहा कि हालांकि राज्य सरकार ने बाद में समझौते को निलंबित करने का फैसला किया, क्योंकि उसे पता चला कि इस योजना का उपयोग राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के प्रावधानों को लागू करने के लिए किया जा सकता है, जिसका एलडीएफ ने विरोध किया था।
उन्होंने कहा, ‘‘राज्य ने केंद्र को औपचारिक रूप से सूचित कर दिया था कि ‘पीएम श्री’ समझौते को रोक दिया गया है। इसीलिए आगे कोई कदम नहीं उठाया गया।’’
शिवनकुट्टी ने यह भी दावा किया कि ‘समग्र शिक्षा केरल’ को जारी किए गए 92.41 करोड़ रुपये ‘पीएम श्री’ की धनराशि नहीं थी, बल्कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत देय प्रतिपूर्ति बकाया से केंद्र द्वारा समायोजित की गई राशि थी।
यूडीएफ पर विरोधाभासी रुख अपनाने का आरोप लगाते हुए, माकपा नेता ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने विपक्ष में रहते हुए इस योजना (पीएम श्री) का विरोध किया था, लेकिन अब इसे लागे करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया, “यूडीएफ सरकार तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करके ‘पीएम श्री’ के साथ आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। यह स्पष्ट होता जा रहा है कि राज्य सरकार ने संघ परिवार के एजेंडे के आगे आत्मसमर्पण कर दिया है।”
भाषा प्रशांत सुरेश
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