नयी दिल्ली, आठ जून (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को केंद्रीय विश्वविद्यालयों में गैर-शिक्षण कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़े कैडर भर्ती नियमों को लागू करने से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए कहा है।
आयोग ने यह निर्देश तब दिया जब उसने पाया कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत एक आवेदक द्वारा उठाया गया मुद्दा “गंभीर चिंता का विषय” था।
यह मामला एक आरटीआई आवेदन से उत्पन्न हुआ है, जिसमें केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अभियंताओं, प्रोग्रामर, सिस्टम विश्लेषकों, नेटवर्क विश्लेषकों, सुरक्षा अधिकारियों और अन्य गैर-शिक्षण कर्मियों के लिए पदोन्नति के अवसरों से संबंधित सिफारिशों पर यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण मांगा गया था।
आवेदक ने आरोप लगाया कि यूजीसी द्वारा आदर्श कैडर भर्ती नियम (सीआरआर) तैयार किए जाने के बावजूद, कुछ विश्वविद्यालय केवल नवनियुक्त कर्मचारियों को ही लाभ दे रहे हैं और इन नियमों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी मांगी।
सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलांगी ने एक आदेश में कहा, ‘‘केंद्रीय विश्वविद्यालयों द्वारा आदर्श कैडर भर्ती नियमों के कार्यान्वयन के संबंध में की गई कार्रवाई का खुलासा न करने का मुद्दा अपीलकर्ता द्वारा सुनवाई के दौरान उठाया गया था, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।’’
आयोग ने “आरटीआई अधिनियम, 2005 की उदार व्याख्या और उद्देश्यपूर्ण दृष्टिकोण” अपनाते हुए सुझाव दिया कि यूजीसी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों और अन्य सक्षम अधिकारियों को पत्र लिखकर गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए कैडर भर्ती नियमों के गैर-कार्यान्वयन से संबंधित चिंताओं को उजागर करे।
सीआईसी ने यह भी कहा कि यदि ऐसा कोई पत्राचार जारी किया जाता है, तो उसकी एक प्रति उसके समक्ष प्रस्तुत की जानी चाहिए और अपीलकर्ता को नि:शुल्क उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
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