Umar khalid sharjeel imam bail hearing: जेल से बाहर नहीं आएंगे उमर खालिद और शरजील इमाम.. दिल्ली दंगे पर हुई सुनवाई, नहीं मिली जमानत

Umar khalid sharjeel imam bail hearing: सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि वह जमानत के मामले में "सभी व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार नहीं कर सकता। रिकॉर्ड से पता चलता है कि सभी अपीलकर्ताओं की दोषसिद्धि समान नहीं है।"

Umar khalid sharjeel imam bail hearing: जेल से बाहर नहीं आएंगे उमर खालिद और शरजील इमाम.. दिल्ली दंगे पर हुई सुनवाई, नहीं मिली जमानत

Umar khalid sharjeel imam bail hearing || Image- ANI News File

Modified Date: January 5, 2026 / 11:46 am IST
Published Date: January 5, 2026 11:21 am IST
HIGHLIGHTS
  • सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की
  • यूएपीए मामले में अहम टिप्पणी
  • पांच अन्य आरोपियों को जमानत

Umar khalid sharjeel imam bail hearing: नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे कथित बड़ी साजिश से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन और साक्ष्यों के आधार पर दोनों की स्थिति अन्य आरोपियों से “गुणात्मक रूप से भिन्न” है और कथित अपराधों में उनकी भूमिका “केंद्रीय” बताई गई है।

याचिकाओं पर हुई सुको में सुनवाई (Supreme Court Hearing)

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और एनवी अंजारी की पीठ ने इन आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाया।

अदालत ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम की निरंतर और लंबी हिरासत, संवैधानिक जनादेश या कानून के तहत लगाए गए वैधानिक प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं करती। इससे पहले, सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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कोर्ट ने की मामले में अहम टिप्पणी (Supreme Court Observations)

Umar khalid sharjeel imam bail hearing: जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने मुख्य रूप से मुकदमे में देरी और ट्रायल शुरू होने की असंभावना का हवाला दिया। उन्होंने दलील दी कि आरोपी पांच साल से अधिक समय से हिरासत में हैं और अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि उन्होंने हिंसा भड़काई थी।

वहीं, दिल्ली पुलिस ने जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि कथित अपराधों में राज्य को अस्थिर करने का जानबूझकर किया गया प्रयास शामिल है। पुलिस के अनुसार, ये घटनाएं स्वतःस्फूर्त विरोध नहीं थीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन और आर्थिक गला घोंटने के उद्देश्य से रची गई एक सुनियोजित “अखिल भारतीय” साजिश का हिस्सा थीं।

क्या है दिल्ली पुलिस की दलील? (Delhi Police Argument)

दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि कथित साजिश को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के समय के साथ जोड़ा गया था, ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित किया जा सके और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठाया जा सके। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, “शांतिपूर्ण विरोध” के नाम पर CAA को एक “कट्टरपंथी उत्प्रेरक” के रूप में चुना गया था।

Umar khalid sharjeel imam bail hearing: अभियोजन ने आगे दावा किया कि इस कथित पूर्व नियोजित साजिश के परिणामस्वरूप 53 लोगों की मौत हुई, सैकड़ों लोग घायल हुए और सार्वजनिक संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा, जिसके चलते दिल्ली में 753 एफआईआर दर्ज की गईं। पुलिस के अनुसार, रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्य यह भी दर्शाते हैं कि इस साजिश को देश के अन्य हिस्सों में दोहराने की कोशिश की जा रही थी।

दिल्ली दंगो में गई थी 53 लोगों की जान (2020 Delhi Riots Death Toll)

गौरतलब है कि 2 सितंबर 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने उमर खालिद और शरजील इमाम सहित नौ आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उच्च न्यायालय ने तब टिप्पणी की थी कि पूरी साजिश में खालिद और इमाम की भूमिका प्रथम दृष्टया गंभीर है और उन्होंने कथित तौर पर सांप्रदायिक आधार पर भड़काऊ भाषण देकर लोगों को उकसाया।

उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों को फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों के मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। यह हिंसा तत्कालीन प्रस्तावित नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी, जिसमें 53 लोगों की जान गई और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

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