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नयी दिल्ली, 10 जून (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर सराहना करते हुए सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया और इस उपलब्धि को भारतीय लोकतंत्र की यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया।
मंत्रिमंडल के सदस्यों ने मोदी के कार्यकाल के 4,399 दिन पूरे होने पर खड़े होकर करतल ध्वनि से उनका अभिवादन किया।
मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में पारित प्रस्ताव में उन्हें चुने हुए प्रधानमंत्री के तौर पर जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने पर बधाई दी गई और भरोसा जताया गया कि मोदी के नेतृत्व में भारत ‘‘आत्मनिर्भर, सुरक्षित और समृद्ध राष्ट्र के तौर पर नई ऊंचाई हासिल करता रहेगा’’।
मंत्रिमंडल ने मोदी के ‘‘विकसित भारत’’ के दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा, समावेशी विकास तथा सामाजिक न्याय के मामलों में उनके नेतृत्व की प्रशंसा की।
सरकार के विकास के एजेंडे का जोरदार समर्थन करते हुए, मंत्रिमंडल ने 2047 तक विकसित भारत बनाने की दिशा में मोदी के नेतृत्व को पूरा समर्थन दिया और जनसेवा के प्रति उनके अथक समर्पण की सराहना की।
प्रस्ताव में ‘‘समावेशी विकास और सामाजिक न्याय’’ की दिशा में मोदी के प्रयासों की सराहना की गई और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने तथा भारत के हितों की रक्षा करने में उनके नेतृत्व की प्रशंसा की गई।
मंत्रिमंडल ने गरीबों के लिए कल्याणकारी कार्यक्रम चलाने और हाशिए पर मौजूद वर्गों को सशक्त बनाने का श्रेय भी प्रधानमंत्री मोदी को दिया तथा इस बात का उल्लेख किया कि उनके कार्यकाल में 25 करोड़ से ज्यादा लोगों ने गरीबी से मुक्ति पाई है।
मोदी ने 26 मई 2014 को भाजपा की भारी जीत के बाद प्रधानमंत्री का पद संभाला। 2019 में उन्हें और भी बड़े जनादेश के साथ दोबारा चुना गया और उसी साल 30 मई को उनका दूसरा कार्यकाल शुरू हुआ। मोदी का लगातार तीसरा कार्यकाल नौ जून 2024 को शुरू हुआ।
प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘यह अवसर भारत की लोकतांत्रिक चेतना, जन-विश्वास और लोगों की भागीदारी की शक्ति का प्रतीक है।’’
इसमें कहा गया, ‘‘जब कोई जन-प्रतिनिधि ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प के साथ जीता है, जब वह सच्चाई, ईमानदारी, कड़ी मेहनत और सदाचार को अपने जीवन का मार्गदर्शक सिद्धांत बनाता है और लोगों की सेवा के लिए पूरी निष्ठा से समर्पित रहता है, तो जनता उसे अभूतपूर्व समर्थन के रूप में अपना आशीर्वाद देती है। आज का ऐतिहासिक क्षण उसी जन-आशीर्वाद का प्रतिबिंब है।’’
इस मौके पर प्रधानमंत्री ने क्या कहा, यह पूछे जाने पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि मोदी ने लोगों की सेवा पूरी निष्ठा से जारी रखने और पहले से भी ज्यादा मेहनत करने के अपने संकल्प को दोहराया।
वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों से जनता की आकांक्षाओं को समझने और उन्हें पूरा करने की दिशा में काम करने का भी आग्रह किया।
प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया कि लगभग छह दशकों के बाद, देश ने मोदी के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार राजग सरकार को जनादेश दिया है।
इसमें कहा गया, ‘‘हमें गर्व है कि हमारा नेतृत्व ऐसे सक्षम हाथों में है जिनमें संवेदनशीलता, संयम, नेक नीयत और निर्णायक क्षमता है।’’
प्रस्ताव में कहा गया कि मोदी का जीवन सेवा, साहस और राष्ट्र-निर्माण के निरंतर प्रयासों का प्रतीक रहा है। साथ ही, यह भी कहा गया कि जमीनी हकीकत की उनकी समझ ने नीतियों को अधिक संवेदनशील, व्यावहारिक और परिणाम-उन्मुख बनाया है।
प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद, मोदी ने संसद के सेंट्रल हॉल में खुद को ‘प्रधान सेवक’ कहा। उन्होंने देश के संविधान को एक पवित्र ग्रंथ बताया और यह भी कहा कि उनकी सरकार गरीबों के लिए समर्पित है। ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को सरकार का ध्येय वाक्य बनाते हुए, पिछले 12 साल इन्हीं संकल्पों को साकार करने वाले रहे हैं।’’
मंत्रिमंडल के प्रस्ताव में पिछले 12 वर्षों में किए गए कई सुधारों और नीतिगत फैसलों का भी जिक्र किया गया, जिनमें अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को रद्द करना, जीएसटी लागू करना, ‘वन रैंक, वन पेंशन’, नए आपराधिक कानून और मैन्युफैक्चरिंग व आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाले उपाय शामिल हैं।
इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सरकार के कदमों, वामपंथी उग्रवाद से निपटने की कोशिशों, पूर्वोत्तर में शांति की पहल और जी20 जैसे मंचों के जरिए भारत की बढ़ती वैश्विक पहचान का भी जिक्र किया गया।
भाषा शफीक प्रशांत
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