मांड्या, 14 जून (भाषा) केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बेंगलुरु दक्षिण जिले के बिदादी में प्रस्तावित ‘ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप’ (जीबीआईटी) परियोजना को लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर रविवार को निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार रियल एस्टेट क्षेत्र के फायदे के लिए और किसानों के खिलाफ काम कर रही है।
मांड्या में संवाददाताओं से बातचीत में कुमारस्वामी ने कहा कि कांग्रेस सरकार टाउनशिप परियोजना के लिए उपजाऊ कृषि भूमि का जबरदस्ती अधिग्रहण कर रही है। उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना का बड़े पैमाने पर विरोध होने के बावजूद किसानों को डराया-धमकाया जा रहा है।
जीबीआईटी मुख्यमंत्री शिवकुमार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है, जिसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर आधारित भारत की पहली इंटीग्रेटेड टाउनशिप के तौर पर पेश किया जा रहा है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस परियोजना के तहत इलाके के नौ गांवों की लगभग 7,481 एकड़ जमीन शामिल होने की उम्मीद है।
केंद्रीय इस्पात और भारी उद्योग मंत्री ने शिवकुमार की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “शिवकुमार एक रियल एस्टेट कारोबारी हैं। सिर्फ तीन एकड़ की पुश्तैनी जमीन 1,400 करोड़ रुपये की संपत्ति कैसे बन गई? क्या उन्हें इस बारे में सफाई नहीं देनी चाहिए?”
कुमारस्वामी ने कहा, “मुख्यमंत्री को राज्य के लोगों को बताना चाहिए कि इतनी संपत्ति कैसे जमा की जा सकती है और कोई इतनी जल्दी अमीर कैसे बन सकता है। यह लोगों के लिए भी बहुत फायदेमंद होगा।”
राज्य सरकार और निजी क्षेत्र के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि बिदादी टाउनशिप सरकार की एक रियल एस्टेट परियोजना है। उन्होंने प्रशासन पर स्थानीय निवासियों के विरोध के बावजूद किसानों की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया।
कुमारस्वामी ने कहा, “कांग्रेस सरकार खुद लोगों की जमीन लूटने में लगी है। मुख्यमंत्री ने इस धंधे को चलाने के लिए सीधे तौर पर रियल एस्टेट माफियाओं से हाथ मिला लिया है।”
उन्होंने दावा किया कि ज्यादातर किसान अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं और अधिकारी उन पर दबाव बनाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रहे हैं।
कुमारस्वामी ने बिदादी टाउनशिप परियोजना को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का समर्थन हासिल होने के दावे को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि गुजरात में बड़ी औद्योगिक और टाउनशिप परियोजनाएं उपजाऊ कृषि भूमि के बजाय सूखी और सिंचाई-योग्य न होने वाली जमीन पर विकसित की गईं।
भाषा पारुल प्रशांत
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