जयपुर, 14 जून (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को कहा कि विपक्षी गठबंधन को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को चेहरा बनाकर प्रस्तुत करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन को उनके नेतृत्व को खुले तौर पर स्वीकार करना चाहिए और देश के सामने मोदी तथा राहुल गांधी के बीच स्पष्ट राजनीतिक मुकाबला होना चाहिए।
गहलोत ने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि मुकाबला “भाजपा बनाम सब” होना चाहिए, न कि “कांग्रेस बनाम सब।”
उन्होंने दावा किया कि यदि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आज सत्ता में होतीं तो धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले भाजपा जैसे दल पर प्रतिबंध लगा देतीं।
जयपुर में एक पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए गहलोत ने कहा कि इंडिया गठबंधन को मजबूत करने की आवश्यकता है और इसमें सबसे बड़ी जिम्मेदारी कांग्रेस की है क्योंकि वह गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है।
उन्होंने कहा, “यदि गठबंधन को मजबूत करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी किसी दल पर है तो वह कांग्रेस है। हाल ही में शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि कांग्रेस से अलग हुए सभी दलों को वापस कांग्रेस में आना चाहिए। मैंने उस विचार का समर्थन किया। मैंने यह भी कहा कि इंडिया गठबंधन को खुलकर राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार करना चाहिए। यही मेरी राय है।”
राहुल गांधी की प्रशंसा करते हुए गहलोत ने उन्हें निडर नेता बताया जो संसद के अंदर और बाहर लगातार देश से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “राहुल गांधी बार-बार देश के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में चेतावनी दे रहे हैं। वह साहसी नेता हैं, जो डरते नहीं। वह प्रधानमंत्री मोदी की आंखों में आंखें डालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सवाल पूछते हैं, लेकिन जवाब नहीं मिलते।”
इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के दौर का उल्लेख करते हुए गहलोत ने कहा कि कांग्रेस ने ऐतिहासिक रूप से एकजुट विपक्ष का सामना किया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में भाजपा के खिलाफ व्यापक विपक्षी मोर्चे की जरूरत है।
गहलोत ने कहा, “यदि आज इंदिरा गांधी जीवित होतीं और सत्ता में होतीं तो वह भाजपा जैसे दल पर प्रतिबंध लगा देतीं। आप हिंदुत्व और धर्म के आधार पर राजनीतिक दल नहीं चला सकते। संविधान धर्म के नाम पर राजनीति की अनुमति नहीं देता।”
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने युवाओं और छात्रों से राजनीति में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
उन्होंने कहा, “अपने 50 वर्ष के राजनीतिक जीवन में मैंने देश में आज जैसी खतरनाक स्थिति कभी नहीं देखी। यदि देश ने अब भी अपनी दिशा नहीं सुधारी तो भविष्य में जनता को परिणाम भुगतने होंगे। युवा पीढ़ी का कोई भविष्य नहीं बचेगा और स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
गहलोत ने कहा, “मैं युवाओं और छात्रों से राजनीति में आने की अपील करता हूं। यदि आप देश को बचाना चाहते हैं तो आपको विभिन्न विचारधाराओं को समझना होगा। विचारधाराओं का अध्ययन करें और जिस विचारधारा को आप सही मानते हैं, उसे स्वीकार करें। मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता कि आप किस दल या विचारधारा को चुनते हैं, लेकिन राजनीति में भाग जरूर लें।”
गहलोत ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाएं अभूतपूर्व दबाव में हैं और देश की स्थिति लोगों की सोच से भी अधिक गंभीर है।
उन्होंने कहा, “लोकतंत्र खतरे में है, लेकिन स्थिति लोगों की सोच से भी बदतर है। अन्याय और दमन हो रहा है। संस्थाएं दबाव में हैं, चाहे वह न्यायपालिका हो, जांच एजेंसियां हों या नौकरशाही।”
गहलोत ने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं के खिलाफ राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है।
भाषा बाकोलिया जोहेब
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