प्रबंधन की विचारधारा से अलग विचारों की शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति को नहीं रोक सकता विश्वविद्यालय: अदालत

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प्रबंधन की विचारधारा से अलग विचारों की शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति को नहीं रोक सकता विश्वविद्यालय: अदालत

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  • Publish Date - March 24, 2026 / 07:54 PM IST,
    Updated On - March 24, 2026 / 07:54 PM IST

नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने डॉ. बी. आर. आंबेडकर विश्वविद्यालय की एक छात्रा का निलंबन रद्द कर दिया है, जिसे एक विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के आरोप में निलंबित किया गया था। अदालत ने कहा कि वाक् और विचारों की शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति को केवल इसलिए प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे प्रबंधन की विचारधारा से मेल नहीं खाते।

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि एक विश्वविद्यालय को ऐसा वातावरण बनाना चाहिए, जिसमें छात्र शैक्षणिक या सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा में भाग लेने के लिए स्वतंत्र महसूस करें तथा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और अहिंसक असहमति ऐसे वातावरण का स्वाभाविक हिस्सा हैं।

न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि जो विश्वविद्यालय केवल आज्ञाकारिता को स्वीकार करता है, वह अपनी व्यापक शैक्षिक भूमिका में विफल रहता है। अदालत ने कहा कि ऐसा इसलिए, क्योंकि यह केवल एक ऐसी जगह नहीं है जहां छात्र कक्षाएं लेते हैं और पाठ्यक्रम पूरा करते हैं, बल्कि यह वह जगह भी है, जहां उनसे स्वतंत्र विचार प्रक्रियाओं को सीखने और विकसित करने, प्रश्न पूछने की क्षमता विकसित करने और आलोचनात्मक चिंतन में संलग्न होने की अपेक्षा की जाती है।

अदालत ने 13 मार्च को पारित एक आदेश में कहा, ‘‘एक विद्यालय/विश्वविद्यालय राज्य का एक अंग है और एक अनिवार्य सार्वजनिक कार्य करता है, अर्थात् भविष्य के निर्माताओं को आकार देना। विश्वविद्यालय केवल इसलिए वाक् और विचारों की शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति को प्रतिबंधित नहीं कर सकता, क्योंकि छात्रों के एक समूह द्वारा व्यक्त किए गए विचार प्रबंधन की विचारधारा से मेल नहीं खाते।’’

अदालत ने कहा, ‘‘जब छात्र शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से, बिना हिंसा या गंभीर व्यवधान के असहमति व्यक्त करते हैं, तो ऐसे आचरण को समग्र विकास के दायरे से बाहर नहीं माना जा सकता। इसके विपरीत, यह विश्वविद्यालय द्वारा प्रोत्साहित की जाने वाली विचार-विमर्श और चर्चाओं की स्वतंत्रता की भावना को दर्शाता है।’’

अदालत ने कहा कि किसी विश्वविद्यालय की भूमिका हर प्रकार की असहमति (विरोध) को दबाने की नहीं होती, बल्कि यह सुनिश्चित करने की होती है कि ऐसी अभिव्यक्ति का उचित उत्तर दिया जाए और उसे समझा जाए तथा उसका समाधान किया जाए।

प्रतिवादी ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता छात्रा धरने में भाग ले रही थी, जो अदालत द्वारा पारित आदेश का उल्लंघन था।

हालांकि, अदालत ने कहा कि भले ही याचिकाकर्ता मनमाने कारण बताओ नोटिस को वापस लेने, निलंबनों को रद्द करने और समय-सारिणी बहाल करने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन में भाग ले रही थी, फिर भी उसे निष्कासित करना एक अत्यधिक असंगत (अनुपातहीन) अनुशासनात्मक कार्रवाई थी।

अदालत ने कहा कि अदालत के आदेश का उल्लंघन करने का दंड प्रतिवादी विश्वविद्यालय के पास नहीं, बल्कि केवल अदालत के पास है और यह अपेक्षा की जाती है कि वह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को नहीं दबाएगा, जो उसके कामकाज और अन्य छात्रों की शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा नहीं डालता है।

अदालत ने कहा, ‘वर्तमान मामले में, ऐसा कोई आरोप नहीं है कि याचिकाकर्ता द्वारा किए गए तथाकथित शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के परिणामस्वरूप प्रतिवादी विश्वविद्यालय के कामकाज या अन्य छात्रों की शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा उत्पन्न हुई।’

अदालत ने कहा, ‘‘मेरा मानना ​​है कि याचिकाकर्ता पर लगाया गया दंड उसके कथित कृत्यों के अनुपात में बहुत अधिक है और इसे बरकरार नहीं रखा जा सकता। अतः, याचिका स्वीकार की जाती है।”

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता पहले ही अपने शैक्षणिक जीवन का एक वर्ष गंवा चुकी है और समय को वापस नहीं लाया जा सकता। अदालत ने कहा कि इस अवधि को दंड माना जाएगा और उसे जुलाई से अपनी पढ़ाई फिर से शुरू करने की अनुमति दी।

ग्लोबल स्टडीज में नामांकित एक छात्र द्वारा रैगिंग और दुर्भावनापूर्ण एवं लैंगिक रूप से असंवेदनशील टिप्पणियों के आरोपों के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण याचिकाकर्ता को मार्च 2025 में निलंबित कर दिया गया था।

पंद्रह अप्रैल 2025 को, उच्च न्यायालय ने एक अलग याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को कक्षाओं में उपस्थित होने की अनुमति दी, लेकिन साथ ही उसे निर्देश दिया कि वह इस बीच किसी भी विरोध प्रदर्शन में भाग न ले।

हालांकि, प्रतिवादी विश्वविद्यालय ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता ने एक अन्य परिसरव्यापी बहिष्कार में भाग लिया था, जिसके कारण जून 2025 को उसे निष्कासित कर दिया गया।

याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने किसी भी विरोध प्रदर्शन में भाग नहीं लिया था और वह केवल एक मित्र से मिलने के लिए विरोध स्थल पर उपस्थित थी, जिस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने उसकी एक तस्वीर खींच ली थी।

भाषा अमित दिलीप

दिलीप