प्रयागराज, नौ जुलाई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तलाक के बाद दोबारा शादी कर चुकी एक महिला को गुजारा भत्ता दिए जाने के मामले में झांसी की एक अदालत से स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने सात जुलाई को महिला के पूर्व पति की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
याचिका में झांसी परिवार न्यायालय के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश द्वारा महिला को हर महीने 10,000 रुपये गुजारा भत्ता देने के आदेश को चुनौती दी गई थी। अदालत ने महिला को नोटिस जारी करते हुए कहा, “झांसी कुटुम्ब न्यायालय के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश हरीश चंद्र को यह स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया जाता है कि महिला की दूसरी शादी की जानकारी होने के बावजूद पूर्व पति को उसे 10,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश क्यों दिया गया।”
महिला के पूर्व पति की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि झांसी स्थित कुटुम्ब न्यायालय के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश ने 30 जुलाई, 2025 को दोनों पक्षों को तलाक की मंजूरी दी थी।
वकील ने यह भी बताया गया कि एक महीने बाद ही पत्नी ने दोबारा शादी कर ली।
उन्होंने कहा, “पत्नी की दूसरी शादी की जानकारी एक हलफनामे के माध्यम से दी गई थी। इसके बावजूद कुटुम्ब न्यायालय के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश ने पत्नी को 10,000 रुपये और बेटे को 5,000 रुपये गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया। जबकि कानून के अनुसार, दोबारा शादी के बाद पत्नी गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं होती।”
अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
भाषा जितेंद्र
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