प्रयागराज, 13 जनवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नशीले पदार्थों की तस्करी के 49 मामलों में आरोपी रहे व्यक्ति को मंगलवार को जमानत प्रदान की। आरोपी के खिलाफ पिछले लगभग 20 वर्षों में ये मामले दर्ज किए गए थे। हालांकि, बाद में या तो इन मामलों में उसे बरी कर दिया गया या फिर मामले से उसका नाम हटा लिया गया था।
न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने मुजफ्फरनगर के गौरव उर्फ गौरा द्वारा दायर जमानत याचिका मंजूर की।
याचिकाकर्ता के दावे के मुताबिक, “मुजफ्फरनगर के खतौली थाने की पुलिस उसके खिलाफ झूठे मामले इसलिए दर्ज करती रही क्योंकि उसके पिता ने 26 अप्रैल, 2002 को कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।”
याचिकाकर्ता के मुताबिक, “उसे मौजूदा मामले में झूठा फंसाया गया है और जैसा कि प्राथमिकी में आरोप है, उसके पास से 102.66 ग्राम एल्प्राजोलम बरामद नहीं किया गया। इसके अलावा, बरामद किया गया मादक पदार्थ वास्तव में एल्प्राजोलम पाउडर है या कुछ और, इसे साबित करने के लिए कोई केमिकल विश्लेषण रिपोर्ट नहीं है। यह बरामदगी एक दिखावा थी।”
राज्य सरकार की ओर से पेश अपर महाधिवक्ता ने सुनवाई के दौरान स्वीकार किया कि याचिकाकर्ता के पिता द्वारा कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच भी सीबीसीआईडी ने की थी।
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा, “दोष सिद्ध होने के बाद ही दंड शुरू होता है और जब तक व्यक्ति पर उचित ढंग से मुकदमा नहीं चलाया जाता और वह दोषी नहीं पाया जाता, तब तक वह निर्दोष माना जाता है।”
भाषा राजेंद्र शफीक