उपहार त्रासदी: अदालत ने सीबीआई को पूर्व आईपीएस अधिकारी के खिलाफ अर्जी वापस लेने की अनुमति दी

उपहार त्रासदी: अदालत ने सीबीआई को पूर्व आईपीएस अधिकारी के खिलाफ अर्जी वापस लेने की अनुमति दी

उपहार त्रासदी: अदालत ने सीबीआई को पूर्व आईपीएस अधिकारी के खिलाफ अर्जी वापस लेने की अनुमति दी
Modified Date: June 1, 2026 / 10:46 pm IST
Published Date: June 1, 2026 10:46 pm IST

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को सीबीआई को 1997 के उपहार अग्निकांड के सिलसिले में पूर्व आईपीएस अधिकारी आमोद कंठ के खिलाफ एक मामले में ‘क्लोजर रिपोर्ट’ को स्वीकार करने के अनुरोध वाली अर्जी वापस लेने की अनुमति दे दी।

अप्रैल में, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट टी प्रियदर्शनी द्वारा सीबीआई को 1 जून तक वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहे जाने के बाद, कंठ के खिलाफ मामले को बंद करने की एजेंसी की कोशिश न्यायिक जांच के दायरे में आ गई।

सोमवार को अपने आदेश में, अदालत ने कहा, ‘‘वस्तु स्थिति रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि उपहार त्रासदी के पीड़ितों के संघ (एवीयूटी) द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की गई है, जिसमें भारत सरकार के साथ-साथ सीबीआई को अभियोजन की मंजूरी से संबंधित प्रासंगिक रिकॉर्ड पेश करने और मंजूरी के मुद्दे पर पुनर्विचार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है…।’’

अदालत ने कहा कि एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उच्च न्यायालय ने जून 2019 में रिट याचिका को (मामला उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित होने के कारण) अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया था, लेकिन (शीर्ष अदालत के निर्देश पारित करने के बाद) मामले को फिर से खोला गया था तथा इस साल 23 अप्रैल को संवैधानिक न्यायालय ने उसे वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।

अदालत ने कहा, ‘‘मामला अब 6 जून को उच्च न्यायालय के समक्ष सूचीबद्ध है और सीबीआई मंजूरी के संबंध में अपने फैसले के बारे में उच्च न्यायालय को सूचित करेगी।’’

अदालत ने कहा कि एजेंसी के वकील ने ‘‘कानून के अनुसार नये सिरे से दायर करने की छूट’’ के साथ ‘क्लोजर रिपोर्ट’ की स्वीकृति के अनुरोध वाली अर्जी को वापस लेने का अनुरोध किया।

अदालत ने कहा, ‘‘सीबीआई द्वारा दायर वर्तमान अर्जी को वापस लिया गया मानकर निस्तारित किया जाता है।’’

तेरह जून 1997 को ‘बॉर्डर’ फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान ग्रीन पार्क के उपहार सिनेमा हॉल में दम घुटने और झुलसने से कुल 59 दर्शकों की मौत हो गई थी।

यह आरोप लगाया गया था कि कंठ ने उपायुक्त (लाइसेंसिंग) के नाते 1970 के दशक के अंत में उपहार सिनेमा हॉल में अतिरिक्त सीटों की अनुमति दी थी, जिसके कारण कुर्सियों की कतारों के बीच गलियारे बंद हो गए थे। यह स्पष्ट रूप से पीड़ितों के लिए घातक साबित हुआ क्योंकि आग लगने पर जब धुआं सिनेमाघर में भर गया तो वे बाहर नहीं निकल सके।

भाषा सुभाष वैभव

वैभव


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