नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने बुधवार को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश द्वारा कथित तौर पर एक प्रक्रियात्मक चूक के कारण एक युवा अधिवक्ता को 24 घंटे की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर ‘गहरी चिंता और हैरानी’ जतायी और भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत से इस घटना का संज्ञान लेने का आग्रह किया।
एससीबीए के अध्यक्ष विकास सिंह के माध्यम से जारी प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया कि न्यायिक शक्ति का सबसे अच्छा प्रदर्शन भय के बजाय धैर्य के माध्यम से होता है, खासकर उन युवा अधिवक्ताओं के साथ व्यवहार करते समय जो अब भी पेशे की बारीकियां सीख रहे हैं।
उसने कहा, ‘‘एससीबीए आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में पांच मई, 2026 को हुई कथित घटना पर गहरी चिंता और हैरानी जताता है, जिसमें न्यायमूर्ति तरलादा राजशेखर राव के समक्ष अदालती कार्यवाही के दौरान एक युवा वकील को कथित तौर पर 24 घंटे के लिए न्यायिक हिरासत में लेने का निर्देश दिया गया था।’’
इसके प्रस्ताव में कहा गया है, ऐसा कोई भी कदम जो युवा वकीलों में डर, अपमान या भय का माहौल पैदा करे, वह वकालत की स्वतंत्रता और न्याय प्रणाली के सही तरीके से काम करने पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
बार एसोसिएशन ने कहा, “एससीबीए प्रधान न्यायाधीश से विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता है कि वह इस मामले का उचित संस्थागत संज्ञान लें, संबंधित अभिलेख और कार्यवाही मंगवाएं और न्यायपालिका में जनता का विश्वास बनाए रखने तथा बार-पीठ के सौहार्दपूर्ण संबंधों को कायम रखने के हित में उचित सुधारात्मक और प्रशासनिक उपाय करें।”
प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया कि पीठ और बार के बीच संबंध परस्पर सम्मान, गरिमा, धैर्य और संस्थागत संतुलन पर आधारित है और वकील अदालत के अधिकारी हैं।
प्रस्ताव में कहा गया, “अदालतों के अधिकार और गरिमा का हमेशा सम्मान होना चाहिए और उसे बनाए रखना चाहिए, वहीं न्यायिक शक्तियों का प्रयोग संयम, अनुपात, निष्पक्षता और करुणा को भी प्रतिबिंबित करना चाहिए।”
प्रस्ताव में कहा गया कि न्यायिक शक्ति धैर्य और संतुलित आचरण के माध्यम से प्रदर्शित होनी चाहिए, विशेष रूप से उन युवा वकीलों के साथ व्यवहार करते समय जो अब भी पेशे की बारीकियां सीख रहे हैं और विकसित हो रहे हैं।
इससे पहले दिन में, भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) ने इसी मामले में प्रधान न्यायाधीश के तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
बीसीआई के अनुसार, ऑनलाइन प्रसारित एक वीडियो में न्यायमूर्ति राव एक युवा वकील को फटकार लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं, जो सुनवाई के दौरान एक विशिष्ट आदेश की प्रति प्रस्तुत करने में असमर्थ था।
एक औपचारिक निवेदन में, बीसीआई ने कहा कि वकील द्वारा ‘‘बार-बार क्षमा और दया की गुहार लगाने’’ और शारीरिक पीड़ा में होने का दावा करने के बावजूद, न्यायाधीश पर ‘कोई प्रभाव नहीं पड़ा।’’
न्यायाधीश ने कथित तौर पर वकील से कहा, ‘अब तुम सबक सीखोगे,’ और उसके अनुभव का उपहास उड़ाते हुए रजिस्ट्रार और पुलिसकर्मियों को उसे 24 घंटे के लिए हिरासत में लेने का निर्देश दिया।
बीसीआई के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने अपने पत्र में कहा कि न्यायाधीश का फैसला संतुलित नहीं था और उसमें न्यायसंगतता की कमी थी।
भाषा अमित सुरेश
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