उप्र: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बंदरों की समस्या नियंत्रित करने के लिए कार्य योजना मांगी

उप्र: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बंदरों की समस्या नियंत्रित करने के लिए कार्य योजना मांगी

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  • Publish Date - January 14, 2026 / 08:54 PM IST,
    Updated On - January 14, 2026 / 08:54 PM IST

प्रयागराज, 14 जनवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को बंदरों की समस्या नियंत्रित करने की कार्य योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी के लिए निर्धारित कर दी।

मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने गाजियाबाद के रहने वाले विनीत शर्मा और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

अदालत ने मंगलवार को कहा कि कार्ययोजना तैयार करते समय केंद्र के पशु कल्याण बोर्ड द्वारा प्रस्तुत अस्थायी कार्य योजना पर भी पर्यावरण विभाग द्वारा विचार किया जा सकता है।

पीठ ने इससे पहले मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि इस मामले की संपूर्ण तथ्यात्मक स्थिति को देखते हुए एक भी प्रतिवादी इस समस्या को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी लेने को स्पष्ट रूप से तैयार नहीं है।

अदालत ने कहा कि प्रत्येक विभाग यह जिम्मेदारी दूसरे विभाग पर डालने का प्रयास कर रहा है जबकि सभी प्रतिवादी इस तथ्य से सहमत हैं कि बंदरों की समस्या से आम लोगों के जीवन में संकट पैदा हो रहा है।

अदालत ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से भी यह संकेत दिया जाता है कि सभी विभागों की बैठक हुई है और उसमें भी जिम्मेदारी एक दूसरे पर डालने का प्रयास किया गया।

ऐसी परिस्थितियों में अदालत ने प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (नगर विकास विभाग) को पक्षकार बनाने का आदेश दिया।

राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता ने विशेष सचिव का वह पत्र पेश किया, जिसमें राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की पिछले साल 29 अक्टूबर को हुई बैठक में कुछ सिफारिशें की गई और राज्य सरकार को टकराव वाले क्षेत्रों की पहचान करते हुए विस्तृत योजनाएं बनाने को कहा गया।

अदालत का विचार था कि इस समस्या को लेकर कोई विवाद नहीं है जबकि इस समस्या से निपटने की इच्छाशक्ति का स्पष्ट रूप से अभाव है क्योंकि राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड द्वारा केवल प्रस्ताव दिया गया है लेकिन इसे लागू करने का प्रयास नहीं किया गया।

भाषा सं राजेंद्र जितेंद्र

जितेंद्र