देहरादून, 15 जनवरी (भाषा) उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने बृहस्पतिवार को प्रथम चरण में 10 वर्ष की निरंतर सेवा पूरी करने वाले उपनलकर्मियों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने तथा पर्यटन, होमस्टे और बेड-एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) के पंजीकरण और विनियमन के लिए नयी नियमावली लाने का निर्णय किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक के बाद प्रदेश के गृह सचिव शैलेश बगोली ने बताया कि प्रथम चरण में 10 वर्ष की निरंतर सेवा पूर्ण करने वाले उपनलकर्मियों को समान कार्य के लिए समान वेतन से संबंधित लाभ देने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति की संस्तुतियों पर मंत्रिमंडल ने यह निर्णय किया कि राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उपनलकर्मियों को चरणबद्ध रूप से समान कार्य के लिए समान वेतन का लाभ प्रदान किया जाएगा।
बगोली ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने प्रदेश में 27 जनवरी 2025 से लागू समान नागरिक संहिता के कुछ प्रावधानों के क्रियान्वयन में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों और लिपिकीय त्रुटियों के समाधान के लिए मूल संहिता में अध्यादेश के माध्यम से आवश्यक संशोधन किए जाने को मंजूरी दे दी है।
इसके अलावा, मंत्रिमंडल ने ‘उत्तराखंड पर्यटन, यात्रा व्यवसाय, होमस्टे एवं बेड-एंड ब्रेकफास्ट पंजीकरण नियमावली–2026’ जारी करने का निर्णय किया है, जिसके तहत अब होमस्टे योजना का लाभ राज्य के स्थायी निवासी ही ले सकेंगे।
एक अन्य निर्णय में, वर्तमान पेराई सत्र के लिए प्रदेश की सहकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की चार चीनी मिलों को बैंकों से ऋण लेने हेतु राज्य सरकार की ओर से गारंटी देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।
बगोली ने बताया कि पेराई सत्र 2025-26 के लिए डोईवाला, किच्छा, नादेही और बाजपुर चीनी मिलों के लिए राज्य सरकार 270.28 करोड़ रुपये की गारंटी देगी।
मंत्रिमंडल ने हरिद्वार स्थित उत्तराखंड संस्कृत अकादमी का नाम बदलकर “उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम्” किए जाने का भी निर्णय किया।
इसके अलावा बागवानी मिशन के तहत ‘एंटी-हेल नेट’ योजना पर केंद्र द्वारा देय 50 प्रतिशत अनुदान के अतिरिक्त राज्यांश के रूप में 25 प्रतिशत अतिरिक्त सहायता देने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।
बगोली ने बताया कि सेब, आड़ू, प्लम, खुबानी, नाशपाती जैसी बागवानी फसलों को ‘एंटी-हेल नेट’ के प्रयोग से ओलावृष्टि और आंधी-तूफान से लगभग पूरी तरह बचाया जा सकता है, साथ ही इससे पक्षियों से भी फलों की सुरक्षा होती है।
मंत्रिमंडल ने केदारनाथ धाम में खच्चरों के गोबर को चीड़ की पत्तियों के साथ समान अनुपात में मिलाकर पर्यावरण अनुकूल ईंधन में बदलने के लिए एक प्रायोगिक परियोजना शुरू करने को भी मंजूरी दी है।
भाषा दीप्ति खारी
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