उत्तराखंड में वर्तमान में पीक आवर्स में 350 मेगावाट बिजली की कमी

उत्तराखंड में वर्तमान में पीक आवर्स में 350 मेगावाट बिजली की कमी

उत्तराखंड में वर्तमान में पीक आवर्स में 350 मेगावाट बिजली की कमी
Modified Date: September 25, 2026 / 12:53 pm IST
Published Date: September 25, 2026 12:53 pm IST

देहरादून, 25 सितंबर (भाषा) उत्तराखंड में इन दिनों बिजली की सर्वाधिक खपत वाले समय यानी ‘पीक आवर्स’ के दौरान लगभग 350 मेगावाट की विद्युत कमी हो रही है, जिसके कारण आवश्यकता के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में सीमित एवं नियंत्रित बिजली कटौती करनी पड़ रही है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी ।

उत्तराखंड पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी ने हालांकि कहा कि जलविद्युत उत्पादन में कमी और पीक आवर्स में बिजली की बढ़ती मांग के बावजूद कटौती को न्यूनतम रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं ।

राजधानी देहरादून सहित विभिन्न क्षेत्रों में हो रही बिजली कटौती के बीच ध्यानी ने कहा कि वर्तमान में राज्य में बिजली की कमी का प्रमुख कारण राज्य की जलविद्युत परियोजनाओं से अपेक्षाकृत कम उत्पादन, केंद्रीय जलविद्युत परियोजनाओं से कम विद्युत प्राप्ति तथा पीक आवर्स के दौरान विद्युत मांग में वृद्धि है ।

उन्होंने कहा कि इस साल सितंबर में पिछले वर्ष की तुलना में यूजेवीएन लिमिटेड से प्राप्त जलविद्युत उत्पादन में लगभग 170 मेगावाट की कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2025 के सितंबर पीक आवर्स में यूजेवीएन लिमिटेड का औसत उत्पादन लगभग 1,094 मेगावाट था, जो इस वर्ष घटकर लगभग 912 मेगावाट रह गया ।

ध्यानी के मुताबिक, इसी प्रकार केंद्रीय जलविद्युत स्टेशनों से भी पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 90 मेगावाट कम बिजली मिल रही है । इसके अलावा, टिहरी पम्प स्टोरेज प्लांट की दो इकाइयां तकनीकी कारणों से उपलब्ध नहीं होने के कारण पीक आवर्स में लगभग 100 मेगावाट विद्युत उपलब्धता प्रभावित हो रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘इन सभी परिस्थितियों के सम्मिलित प्रभाव से वर्तमान में पीक आवर्स के दौरान राज्य में लगभग 350 मेगावाट विद्युत की कमी हो रही है और इसी कारण आवश्यकता के अनुसार सीमित एवं नियंत्रित कटौती करनी पड़ रही है ।’’

प्रबंध निदेशक ने बताया कि वर्तमान परिस्थिति में केवल स्थानीय उत्पादन की कमी ही चुनौती नहीं है, बल्कि पीक आवर्स के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर भी विद्युत उपलब्धता सीमित है । उन्होंने कहा कि ऊर्जा एक्सचेंज के तहत दिन के सौर ऊर्जा उपलब्धता वाले घंटों में बिजली अपेक्षाकृत सस्ती एवं पर्याप्त उपलब्ध रहती है, जबकि शाम एवं रात्रि के पीक आवर्स में उपलब्धता कम होने के कारण विद्युत की कीमत काफी अधिक हो जाती है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि यूपीसीएल द्वारा बिजली एक्सचेंज के माध्यम से निरंतर बिजली खरीदने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि राज्य में विद्युत कटौती को न्यूनतम रखा जा सके।

ध्यानी ने कहा कि उपभोक्तओं पर बिजली कटौती के प्रभाव को न्यूनतम रखने के लिए कटौती को प्राथमिकता के आधार पर तय किया गया है ।

उन्होंने साफ किया, ‘‘बिजली कटौती का उद्देश्य विद्युत आपूर्ति को बाधित करना नहीं, बल्कि उपलब्ध सीमित विद्युत संसाधनों का अधिकतम एवं संतुलित उपयोग करते हुए राज्य के अधिकतम उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराना है ।’’

भाषा दीप्ति मनीषा

मनीषा


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