उत्तराखंड सरकार हल्द्वानी में उच्च न्यायालय की नयी इमारत के लिए जमीन का कब्जा सौंपे: न्यायालय

उत्तराखंड सरकार हल्द्वानी में उच्च न्यायालय की नयी इमारत के लिए जमीन का कब्जा सौंपे: न्यायालय

उत्तराखंड सरकार हल्द्वानी में उच्च न्यायालय की नयी इमारत के लिए जमीन का कब्जा सौंपे: न्यायालय
Modified Date: July 15, 2026 / 04:40 pm IST
Published Date: July 15, 2026 4:40 pm IST

नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को उत्तराखंड सरकार को निर्देश दिया कि वह हल्द्वानी में उच्च न्यायालय की नयी इमारत के निर्माण और अन्य जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए छह हफ्ते के भीतर भूमि का कब्जा सौंपे।

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने राज्य सरकार से इस संबंध में अधिसूचना जारी करने को कहा।

शीर्ष अदालत ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के 2024 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें राज्य सरकार से नैनीताल के बाहर नयी इमारत बनाने के लिए ‘‘सबसे उपयुक्त जमीन’’ तलाशने को कहा गया था।

शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की, ‘‘उच्च न्यायालय को न्यायिक पक्ष में ऐसे आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है। ऐसे मुद्दों पर न्यायिक कार्यवाही में विचार नहीं किया जाता है। उच्च न्यायालय का आदेश रद्द किया जाता है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय प्रशासनिक स्तर पर राज्य सरकार के साथ मिलकर बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों का समाधान करे।’’

पीठ ने कहा, ‘‘हमें जानकारी मिली है कि राज्य सरकार ने हल्द्वानी जिले में उच्च न्यायालय की नयी इमारत का निर्माण करने के लिए भूमि चिह्नित की है। इसे छह हफ्ते के अंदर ‘जैसी है, जहां है’ के आधार पर सभी मंजूरियों के साथ उच्च न्यायालय को सौंप दी जाए।’’

सुनवाई के दौरान, उच्च न्यायालय का पक्ष रखने के लिए पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने बताया कि राज्य सरकार ने नयी इमारत के लिए हल्द्वानी में जमीन चिह्नित कर ली है। पृथक राज्य बनने के बाद उत्तराखंड उच्च न्यायालय की प्रधान पीठ नैनीताल में स्थापित की गई और यह नौ नवंबर, 2000 से वहीं से काम कर रही है।

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।

बार एसोसिएशन ने अपनी याचिका में कहा, ‘‘इस मामले में चुनौती दिया गया फैसला कानूनी रूप से गलत है और उत्तराखंड राज्य के व्यापक हित के पूरी तरह खिलाफ है। उच्च न्यायालय ने राज्य की न्यायपालिका की सबसे बड़ी पीठ को नैनीताल में स्थापित करने के पीछे विधायी मंशा पर विचार नहीं किया, जिसके कारण यह विवादित आदेश पारित हुआ।’’

भाषा धीरज सुरेश

सुरेश


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