नैनीताल, छह मई (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बुधवार को किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला को नगरपालिका चुनावों में देरी के संबंध में न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां प्रसारित करने के आरोप में अवमानना नोटिस जारी किया।
न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने कथित रूप से शुक्ला द्वारा प्रसारित एक वीडियो तथा पैंफलेट का संज्ञान लेते हुए उधमसिंह नगर के जिलाधिकारी के माध्यम से यह नोटिस जारी किया। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यह कानून की अदालत है, फिल्म नहीं।’’ कार्यवाही के दौरान शुक्ला भी पेश हुए।
पीठ ने कहा कि न्यायिक गरिमा को कम करने वाली टिप्पणियां अस्वीकार्य हैं और स्पष्ट किया कि सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले का फैसला किया जाएगा। यह भी कहा गया कि मामले पर सुनवाई साप्ताहिक आधार पर की जा रही है।
अदालत शुक्ला के साथ ही उधमसिंह नगर जिले के सिरोली कला के मोहम्मद यासीन और अन्य लोगों द्वारा दायर की गई एक जनहित याचिका समेत कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ता नगर निकाय का कार्यकाल समाप्त होने के बाद शीघ्र चुनाव कराने का अनुरोध कर रहे हैं।
सुनवाई के दौरान, राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपस्थित हुए। अधिकारी ने एक हलफनामा पेश किया, जिसमें कहा गया कि आयोग चुनाव कराने के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने देरी के लिए कुछ कारण भी बताए।
हालांकि, अदालत ने आयोग के स्पष्टीकरण पर असंतोष व्यक्त किया। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि इस समय नगर पालिका का प्रबंधन एक प्रशासक कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि इससे क्षेत्र में जरूरी सार्वजनिक कार्यों में बाधा पहुंच रही है।
याचिका में कहा गया है कि सिरोली कला 2018 से किच्छा नगर पालिका का हिस्सा है। पांच करोड़ रुपये के विकास कार्यों के पूरा होने के बाद क्षेत्र को अलग करने के प्रस्तावित कदम का निवासियों ने विरोध किया है।
भाषा सं दीप्ति आशीष
आशीष