उत्तराखंड: ईरान में फंसे परिजनों की चिंता में कई परिवार, आधे मिनट के फोन कॉल के सहारे उम्मीद

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उत्तराखंड: ईरान में फंसे परिजनों की चिंता में कई परिवार, आधे मिनट के फोन कॉल के सहारे उम्मीद

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  • Publish Date - March 5, 2026 / 04:38 PM IST,
    Updated On - March 5, 2026 / 04:38 PM IST

देहरादून, पांच मार्च (भाषा) देहरादून के अंबारी गांव के कई परिवार इन दिनों गहरी बेचैनी में दिन काट रहे हैं। ईरान में बढ़ते संघर्ष के बीच वहां फंसे अपने परिजनों की खैरियत के लिए उनके पास बस आधे मिनट की एक फोन कॉल का सहारा है, जिससे वे किसी तरह अपनों की सलामती की उम्मीद बांधे हुए हैं।

गांव के निवासी जाकिर हुसैन इस्लामी अध्ययन के लिए ईरान गई बेटी और दामाद की खैरियत जानने के लिए अपने मोबाइल फोन पर टकटकी लगाए रहते हैं। हुसैन के भाई, भाभी, उनके बच्चे और एक भतीजे सहित परिवार के अन्य सदस्य भी वहीं हैं।

उन्होंने कहा कि हालात बिगड़ने के बाद से संपर्क करना लगभग नामुमकिन सा हो गया है।

हुसैन ने बताया, “कल रात एक फोन आया था, मुश्किल से आधा मिनट ही बात हुई। मेरी बेटी बस इतना ही कह पाई—‘फिक्र मत कीजिए, हम ठीक हैं,’ और तभी लाइन कट गई।”

उन्होंने कहा कि उस छोटी-सी बातचीत के बाद से फोन फिर बंद आ रहा है।

हुसैन ने अपनी पत्नी को लेकर गहरी चिंता जताई, जिन्हें पहले से ही बेचैनी और घबराहट की शिकायत है।

उन्होंने कहा, “मैं उसे वहां के पूरे हालात भी नहीं बता पा रहा हूं। मुझे डर है कि अगर कुछ बताया तो कहीं उसकी तबीयत और न बिगड़ जाए।”

अंबारी गांव के ही निवासी अयूब खान का परिवार भी ऐसी ही चिंता और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।

खान के भतीजे और उसकी पत्नी पिछले चार वर्षों से ईरान में इस्लामी अध्ययन कर रहे हैं।

खान ने बताया कि बुधवार रात उनके भतीजे का फोन आया था और उसने कहा कि वे तेहरान से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित अपने छात्रावास में सुरक्षित हैं।

खान ने कहा, “फिलहाल वे ठीक हैं, लेकिन डर बना हुआ है कि हालात किसी भी पल बदल सकते हैं।”

परिजनों का कहना है कि उनकी पीड़ा अभी तक केंद्र सरकार या विदेश मंत्रालय तक नहीं पहुंची है।

हुसैन ने बताया कि स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) के अधिकारी एक बार आए थे और उन्होंने परिजनों के नाम, पता तथा पासपोर्ट से जुड़ी जानकारी जुटाई थी, लेकिन उसके बाद प्रशासन की ओर से न तो कोई संपर्क किया गया और न ही किसी तरह का भरोसा दिया गया।

अब ये परिवार सरकार से हस्तक्षेप करने और ईरान में फंसे अपने रिश्तेदारों को सुरक्षित भारत वापस लाने की अपील कर रहे हैं।

अंबारी के इन घरों में हर सुबह एक उम्मीद के साथ शुरू होती है—शायद आज फोन आएगा।

हुसैन ने कहा, “बस इतना जानना चाहते हैं कि वे सुरक्षित हैं। जब तक उन्हें सही-सलामत भारत लौटते नहीं देखेंगे, तब तक दिल को चैन नहीं मिलेगा।”

फिलहाल गांव का माहौल इन परिवारों की बेचैनी से घिरा हुआ है, जो किसी ऐसी खबर का इंतजार कर रहे हैं जो उनके दिलों को थोड़ा सुकून दे सके।

भाषा दीप्ति खारी

खारी