देहरादून, 30 अप्रैल (भाषा) उत्तराखंड में ‘हरित चारधाम यात्रा’ अभियान के तहत पहले ही सप्ताह में केदारनाथ धाम में करीब 1,000 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्र किया गया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को खुलने के साथ ही बड़ी संख्या में तीर्थयात्री यहां पहुंचे रहे हैं।
इसके साथ ही प्लास्टिक की खाली बोतलों सहित अन्य प्रकार का कचरा भी बड़ी मात्रा में जमा हो रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि धाम को प्लास्टिक कचरे से मुक्त रखने के प्रयासों के तहत नगर पंचायत केदारनाथ ने यात्रा के पहले सप्ताह में ही लगभग 1,000 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्र किया है।
उन्होंने बताया कि साथ ही नगर पंचायत गीले कचरे के निस्तारण के लिए पक्के गड्ढे बनाने की योजना पर भी काम कर रही है।
अधिकारियों ने बताया कि नगर पंचायत की ओर से धाम में लगभग 3,000 वर्गफुट क्षेत्र में ‘मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी’ स्थापित की गई है, जहां एकत्रित प्लास्टिक और ठोस कचरे को 15 अलग-अलग श्रेणियों में छांटा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इसके साथ ही यहां एक ‘कॉम्पेक्टर’ मशीन भी लगाई गई है, जो प्लास्टिक बोतलों और अन्य कचरे को दबाकर 30 से 40 किलोग्राम की गठरियों में परिवर्तित कर देती है।
नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी नीरज कुकरेती ने बताया कि एक सप्ताह में एकत्रित लगभग 1,000 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे को बेच दिया जाएगा, जिससे नगर पंचायत को राजस्व भी प्राप्त होगा।
उन्होंने बताया कि कांच, टिन और अन्य प्रकार के कचरे को भी अलग से एकत्र किया जा रहा है, जिसे बाद में सोनप्रयाग ले जाकर कबाड़ के रूप में बेचा जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि धाम में सुबह और शाम दो पालियों में सफाई की व्यवस्था की गई है, जिसके लिए 55 सफाईकर्मियों की तैनाती की गई है।
उन्होंने बताया कि यात्रा मार्ग पर अन्य संस्थाओं द्वारा भी सफाई अभियान चलाया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में स्वच्छता बनी हुई है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी तीर्थयात्रियों से प्लास्टिक का उपयोग न करने की अपील कर चुके हैं।
उन्होंने चारधाम यात्रा की शुरुआत पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भेजे अपने संदेश में पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचने को प्रमुख अपीलों में शामिल किया था।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य का नाजुक पारिस्थितिक तंत्र देखते हुए सभी तीर्थयात्रियों से अपील है कि वे प्लास्टिक कचरा या अन्य अपशिष्ट कहीं भी न फैलाएं।
उन्होंने कहा, “उत्तराखंड सरकार तीर्थ स्थलों, पवित्र नदियों और हिमालयी पर्यावरण के संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। धामों और यात्रा मार्गों पर नगर पालिकाओं तथा ग्राम पंचायतों के माध्यम से नियमित सफाई कराई जा रही है।” भाषा दीप्ति जितेंद्र
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