वाल्मीकि निगम ‘घोटाला’ : सीबीआई ने पूर्व मंत्री नागेंद्र, उनके सहयोगी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए

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वाल्मीकि निगम ‘घोटाला’ : सीबीआई ने पूर्व मंत्री नागेंद्र, उनके सहयोगी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए

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  • Publish Date - June 2, 2026 / 09:33 PM IST,
    Updated On - June 2, 2026 / 09:33 PM IST

नयी दिल्ली, दो जून (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अनुसूचित जनजातियों के लिए आवंटित 89 करोड़ रुपये का व्यक्तिगत लाभ के लिए गबन करने के आरोप में कर्नाटक के पूर्व मंत्री बी नागेंद्र और उनके करीबी सहयोगी नेक्कंती नागराज के खिलाफ मंगलवार को तीन आरोपपत्र दाखिल किए।

सीबीआई ने कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड (केएमवीएसटीडीसीएल), अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग और कर्नाटक जर्मन तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान (केजीटीटीआई) के धन के कथित दुरुपयोग की जांच पूरी करने के बाद बेंगलुरु की एक अदालत के समक्ष आरोपपत्र दाखिल किए।

जांचकर्ताओं ने दलील दी कि कर्नाटक में आर्थिक रूप से सबसे कमजोर समुदायों के लिए निर्धारित धन का एक योजना के माध्यम से गबन किया गया, जिससे सार्वजनिक कल्याण का उद्देश्य विफल हो गया।

कर्नाटक में अनुसूचित जनजातियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने पर केंद्रित विकास योजनाओं को लागू करने के लिए साल 2006 में वाल्मीकि निगम की स्थापना की गई थी।

सीबीआई प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “नागेंद्र तीनों आरोपपत्र में आरोपी के रूप में नामजद हैं, जो इस आपराधिक साजिश के हर पहलू में उनकी व्यापक और केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।”

सीबीआई का आरोप है कि केएमवीएसटीडीसीएल के प्रबंध निदेशक और लेखा अधिकारी ने निगम के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया खाते में 187 करोड़ रुपये अंतरित किए थे।

जांच एजेंसी के मुताबिक, “जाली चेक और आरटीजीएस लेन-देन के माध्यम से 89.63 करोड़ रुपये की राशि धोखाधड़ी से अंतरित की गई। इस धनराशि को लगभग 600 बैंक खातों के माध्यम से आगे भेजा गया और अंततः आरोपियों के लिए इनसे संपत्ति, सोना और वाहन खरीदे गए।”

भाषा पारुल अविनाश

अविनाश