वनवासी कल्याण आश्रम ने अरावली समिति को सुझाव सौंपने के लिए दो महीने का समय और मांगा

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वनवासी कल्याण आश्रम ने अरावली समिति को सुझाव सौंपने के लिए दो महीने का समय और मांगा

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  • Publish Date - August 8, 2026 / 09:26 PM IST,
    Updated On - August 8, 2026 / 09:26 PM IST

नयी दिल्ली, आठ अगस्त (भाषा) अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम ने उच्चतम न्यायालय के निर्देशों पर बनी अरावली पहाड़ियों से जुड़ी उच्च अधिकार प्राप्त समिति के अध्यक्ष से मांग की है कि वह अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं को परिभाषित करने के बारे में हितधारकों को अपने सुझाव देने के लिए समय-सीमा को दो महीने और बढ़ा दें।

उच्चतम न्यायालय द्वारा बनाई गई अरावली समिति ने अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं से जुड़े मामलों पर लोगों और अलग-अलग हितधारकों से राय, सुझाव और जानकारी मांगी है। 25 मई को बनी इस समिति को अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं से जुड़े मामलों और उनसे संबंधित अन्य मुद्दों की जांच करने और 31 अगस्त तक न्यायालय को अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 21 जुलाई को जारी एक प्रेस नोट के अनुसार, समिति ने दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात के हितधारकों के साथ-साथ पर्यावरणविदों, खनन पट्टाधारकों और ऐसे स्थानीय समुदायों से राय, सुझाव और जानकारी मांगी है, जिनकी आजीविका इस क्षेत्र के से जुड़ी हो सकती है।

इसमें कहा गया है कि सुझाव नोटिस के प्रकाशित होने के 21 दिनों के भीतर ईमेल या आधिकारिक गूगल फॉर्म के जरिए भेजे जाने चाहिए।

दो अगस्त को समिति को लिखे एक पत्र में, कल्याण आश्रम के संयुक्त सचिव विष्णु कांत ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा के विपरीत, राजस्थान और गुजरात के दूर-दराज के इलाकों में लाखों जनजातियां रहती हैं, जो संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत संरक्षित हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध इस संस्था ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा, ‘‘चिंताओं को बताने के लिए सिर्फ 20 दिन का समय और व्यापक और सार्थक बातचीत के लिए समिति का कुछ दिनों का जमीनी दौरा सिर्फ एक औपचारिकता है। इसलिए प्रतिक्रिया देने के लिए समय कम से कम दो महीने और बढ़ाया जाना चाहिए।’’

भाषा शफीक रंजन

रंजन