प्रतिबंध के बावजूद भी बाजार में ‘वेप’ उपलब्ध, संसद में उठाया जाएगा यह मुद्दा : स्वाति मालीवाल

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प्रतिबंध के बावजूद भी बाजार में ‘वेप’ उपलब्ध, संसद में उठाया जाएगा यह मुद्दा : स्वाति मालीवाल

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  • Publish Date - May 28, 2026 / 08:29 PM IST,
    Updated On - May 28, 2026 / 08:29 PM IST

नयी दिल्ली, 28 मई (भाषा) राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल ने बृहस्पतिवार को ‘वेपिंग’ को नशे की लत का एक नया जरिया बताते हुए कहा कि वह इस मुद्दे को संसद में उठाएंगी। उन्होंने आगाह किया कि देशव्यापी प्रतिबंध के बावजूद 12 साल की उम्र के बच्चों में भी ई-सिगरेट के इस्तेमाल का चलन तेजी से बढ़ रहा है।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026 से पहले ‘मदर्स अगेंस्ट वेपिंग’ (एमएवी) द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में, मालीवाल ने ‘वेपिंग’ को एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा बताया जो बच्चों के बीच तेजी से नशे का एक आम जरिया बन गया है।

बच्चों और युवाओं के बीच नये जमाने के निकोटीन उत्पादों के सेवन के खिलाफ काम करने वाले समूह, ‘मदर्स अगेंस्ट वेपिंग’ ने कहा कि ऐसे उत्पाद निकोटीन की लत और मादक पदार्थों पर व्यापक निर्भरता की ओर ले जाने वाले प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करते हैं।

मालीवाल ने कहा, ‘‘बतौर संसद सदस्य, मैं इस मुद्दे का पूरी तरह से समर्थन करती हूं और संसद में इस मुद्दे को उठाने की पूरी कोशिश करूंगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इनमें किसी भी प्रकार के खतरे का कोई संकेत नहीं है, और यही असल समस्या है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वेप रासायनिक तरल पदार्थ को गर्म करके एरोसोल बनाता है जो सीधे फेफड़ों में जाता है। यह वाष्प या हानिरहित धुआं नहीं है। यह निकोटीन, डायएसिटाइल, फॉर्मेल्डिहाइड और कई भारी धातुओं का एक जहरीला मिश्रण है।’’

इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 का हवाला देते हुए, मालीवाल ने कहा कि भारत ने ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाकर ‘‘बहुत मजबूत और निर्णायक कदम’’ उठाया है, लेकिन दावा किया कि ‘वेपिंग’ उपकरण अभी भी अनधिकृत बाजार में, विशेष रूप से महानगरों में, उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘12 साल के बच्चे भी इन उपकरणों का इस्तेमाल करने लगे हैं।’’ उन्होंने कहा कि ‘वेपिंग’ के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव बेहद गंभीर हैं।

मालीवाल ने किशोरों के मस्तिष्क विकास, फेफड़ों की क्षति, हृदय संबंधी समस्याओं, कैंसरकारी पदार्थों के संपर्क में आने तथा मानसिक स्वास्थ्य पर ई-सिगरेट और ‘वेपिंग’ के प्रभाव से जुड़ी प्रमुख चिंताओं को भी रेखांकित किया।

उन्होंने कहा, ‘‘निकोटिन किशोरों के मस्तिष्क को प्रभावित करता है और सिगरेट पीने की आशंका को चार गुना बढ़ा देता है। वेपिंग वास्तव में सिगरेट की लत की ओर ले जाने वाला एक नया जरिया है।’’

उन्होंने ‘वेपिंग’ उत्पादों के विपणन और प्रस्तुति की भी आलोचना करते हुए कहा कि बच्चों को लुभाने के लिए स्वाद और आकर्षक डिज़ाइन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘वेपिंग उद्योग ने 15,000 से अधिक स्वाद तैयार किये हैं – कॉटन कैंडी, गमी बियर, ब्लू रसबेरी। ये स्वाद उन वयस्कों के लिए नहीं हैं जो धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं। वास्तव में, इन्हें इस तरह से बनाया गया है कि स्वाद बच्चों को पसंद आए और वे इसके आदी हो जाएं।’’

मालीवाल ने कहा, ‘‘ये उपकरण कलम और यूएसबी ड्राइव जैसे दिखते हैं। इसलिए इन्हें शिक्षकों और अभिभावकों से पूरी तरह छिपाया जा सकता है।’’

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘वेपिंग’ के प्रचार पर भी चिंता जताई।

राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘‘मैंने आज इंस्टाग्राम पर वेपिंग के बारे में सर्च किया और पाया कि कई इन्फ्लुएंसर वास्तव में वेपिंग को बढ़ावा दे रहे हैं। वे ‘कूल’ दिखने की कोशिश कर रहे हैं, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वेपिंग को जो बात बेहद खतरनाक बनाती है, वह है इसके प्रति समाज में किसी तरह के कलंक का न होना। सिगरेट की गंध होती है। धुएं के छल्ले निकलते हैं। दशकों से समाज इसे अस्वीकार करता आया है। माता-पिता इस पर आपत्ति करते हैं, लोग बातें करते हैं। वेपिंग ने चुपचाप इस दीवार को तोड़ दिया है।’’

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के तहत राष्ट्रीय कैंसर निवारण एवं अनुसंधान संस्थान में निदेशक एवं वैज्ञानिक शालिनी सिंह ने कहा, ‘‘ई-सिगरेट के कम हानिकारक होने के बारे में प्रचलित धारणाओं का एक बड़ा हिस्सा उद्योग द्वारा प्रायोजित शोध और साक्ष्यों की चयनात्मक व्याख्या के माध्यम से गढ़ा गया है।’’

दिल्ली विश्वविद्यालय के वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. राज कुमार ने कहा कि जिज्ञासा या साथियों के दबाव में प्रयोग करने वाले युवाओं द्वारा ‘वेपिंग’ को अक्सर ही हानिरहित माना जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन लत अक्सर पहले कश से ही शुरू हो जाती है।’’

भाषा सुभाष नरेश

नरेश