नयी दिल्ली, 28 मई (भाषा) कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट रूप से कहा कि वह खुद को कॉकरोच मानने में गर्व महसूस करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने लद्दाख के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना के उस दावे को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि वांगचुक को ऑनलाइन आंदोलन की उत्पत्ति को लेकर सटीक जानकारी नहीं थी।
यह टिप्पणी वांगचुक और उनकी पत्नी तथा एचआईएएल की सह-संस्थापक गीतांजलि जे आंगमो के साथ हुई बैठक के बाद मंगलवार को सक्सेना द्वारा किए गए एक पोस्ट के जवाब में आई।
उपराज्यपाल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने वांगचुक को ‘‘भ्रामक और भड़काऊ विमर्श गढ़ने’’ के प्रति आगाह किया। साथ ही उन्होंने यह दावा भी किया कि कार्यकर्ता (वांगचुक) ने यह स्वीकार किया कि लद्दाख की तुलना मणिपुर से करना ‘‘विवेक संबंधी चूक’’ का नतीजा था।
सक्सेना ने यह भी दावा किया कि वांगचुक को कॉकरोच पार्टी, या सीजेपी की उत्पत्ति के बारे में सटीक जानकारी नहीं थी और वह ‘‘इसके संस्थापकों की बातों का अध्ययन करेंगे और यदि आवश्यक हुआ तो अपने रुख पर पुनर्विचार करेंगे।’’
इन दावों को खारिज करते हुए वांगचुक ने पीटीआई-भाषा को बताया कि बैठक सौहार्दपूर्ण थी और यह उपराज्यपाल की सार्वजनिक टिप्पणियों में परिलक्षित लहजे से मेल नहीं खाती।
वांगचुक ने कहा, ‘‘लद्दाख के उपराज्यपाल ने हमें चाय पर एक बैठक के लिए आमंत्रित किया। हमने सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण माहौल में लगभग एक घंटे तक उनकी पहलों, हमारे काम और सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।’’
उन्होंने कहा कि सक्सेना ने लद्दाख की तुलना मणिपुर से करने संबंधी उनकी हालिया टिप्पणियों और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रति उनके समर्थन का मुद्दा उठाया, लेकिन वांगचुक के अनुसार इस बातचीत में किसी तरह की चेतावनी या फटकार शामिल नहीं थी।
उन्होंने कहा, ”हमारे जाने के करीब एक घंटे बाद यह देखकर हमें हैरानी हुई, और अच्छा भी नहीं लगा, कि उन्होंने ऐसे अंदाज़ में ट्वीट किया मानो हमें फटकार या चेतावनी दी गई हो।”
वांगचुक ने कहा कि उनका मानना है कि सार्वजनिक संदेश का उद्देश्य कहीं और की राजनीतिक अपेक्षाओं को पूरा करना हो सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगा कि शायद यह दिल्ली में कहीं बैठे किसी ‘बॉस’ को खुश करने के लिए किया गया होगा, जिसने उन्हें मुझे फोन करके ऐसी बातें कहने का निर्देश दिया होगा, लेकिन बैठक ऐसी नहीं थी, केवल ट्वीट ही ऐसा है।’’
शिक्षाविद ने कहा कि उन्होंने जानबूझकर इस पर तुरंत प्रतिक्रिया देने से परहेज किया और कई समाचारपत्रों में टिप्पणी प्रकाशित होने के तीसरे दिन ही जवाब देना चुना।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि यह मेरे विवेक की कोई गलती है। मैं अब भी अपने रुख पर पूरी तरह कायम हूं।’’
वांगचुक ने कहा कि उन्होंने केवल इतना कहा था कि मौजूदा संदर्भ में यह उदाहरण ‘‘टाला जा सकता था’’।
उन्होंने उपराज्यपाल के इस दावे को खारिज किया कि उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) से दूरी बना ली है।
वांगचुक ने कहा कि सक्सेना ने समूह को विदेशी शक्तियों से प्रभावित या नियंत्रित तथा बाहरी संस्थाओं द्वारा वित्त पोषित बताया था।
कार्यकर्ता ने कहा कि ये ऐसे आरोप हैं जिन्हें उन्होंने न तो स्वीकार किया और न ही समर्थन दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कभी नहीं कहा कि मुझे उत्पत्ति के बारे में सटीक जानकारी नहीं है और मैं अपने रुख पर पुनर्विचार करूंगा।’’
वांगचुक के अनुसार, सक्सेना ने इस आंदोलन को ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ बताया और आरोप लगाया कि इसे सोरोस फाउंडेशन जैसी संस्थाओं तथा पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसी विदेशी शक्तियों द्वारा वित्त पोषित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे इस कहानी पर हंसी आ रही थी कि वह रासुका के तहत जेल में बंद रह चुके व्यक्ति को इस तरह की कहानियां सुना रहे हैं। आप वही कहानी उस व्यक्ति को सुना रहे हैं जो इन अत्याचारों का शिकार हुआ।’’
मैग्सायसाय पुरस्कार विजेता ने कहा, ‘‘मैं ‘कॉकरोच पार्टी’ का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं, और मेरा यह विचार अब भी वही है… मैं अपनी कही बात पर कायम हूं कि मैं एक ‘मानद कॉकरोच’ हूं और मैं इसका समर्थन करता हूं।’’
भाषा नेत्रपाल पवनेश
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