मुंबई, 28 मई (भाषा) एल्गार परिषद और माओवादियों के बीच संबंध के मामले में आरोपी सुधा भारद्वाज ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत उस सामग्री को उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है जिसके आधार पर उनकी जमानत रद्द करने का आग्रह किया गया है।
जांच एजेंसी ने 15 मई को भारद्वाज और वरवर राव की जमानत रद्द करने के लिए विशेष एनआईए अदालत में याचिका दायर करके आरोप लगाया गया कि उन्होंने माओवादी विचारधारा का प्रचार करने के इरादे से प्रेस क्लब में एक सभा में भाग लिया, जो ‘स्पष्ट और जानबूझकर की गई अवहेलना’ थी।
भारद्वाज ने जमानत रद्द करने की याचिका में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सभी सामग्री को उपलबध कराए जाने का अनुरोध किया है।
अदालत ने बृहस्पतिवार को कहा कि अदालत में उचित सत्यापन के बाद ही आरोपियों को सामग्री उपलब्ध कराई जाए। मामले की अगली सुनवाई 10 जून को होगी।
भारद्वाज को 2021 में तकनीकी आधार पर जमानत दी गई थी। जमानत देते समय अधीनस्थ अदालत ने कई शर्तें लगाई थीं, जिनमें अदालत की अनुमति के बिना मुंबई न छोड़ना, राष्ट्रीय जांच एजेंसी को पासपोर्ट सौंपना और मामले के बारे में मीडिया से बात न करना शामिल था।
अदालत ने निर्देश दिया था कि आरोपी इसी तरह का या किसी अन्य प्रकार का कोई अन्य अपराध न करें।
यहां की विशेष एनआईए अदालत में दायर याचिका में केंद्रीय जांच एजेंसी ने मुख्य रूप से इस आधार पर उनकी जमानत रद्द करने का अनुरोध किया है कि वह इस साल 19 जनवरी को मुंबई प्रेसवार्ता में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
जांच एजेंसी की याचिका में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि दोनों आरोपियों ने अरुण फरेरा, आनंद तेलतुंबडे, रोना विल्सन और अन्य कई सह-आरोपियों के साथ कथित तौर पर बैठक में भाग लिया था।
याचिका में कहा गया है कि यह बैठक प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) की विचारधारा का प्रचार करने और ‘शहरी नक्सल’ आंदोलन को फैलाने के लिए भविष्य की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श करने के उद्देश्य से बुलाई गई थी।
यह मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है, जिसके बारे में पुलिस का दावा है कि इसने अगले दिन पश्चिमी महाराष्ट्र शहर के बाहरी इलाके में स्थित कोरेगांव भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा को भड़काया।
शुरू में मामले की जांच करने वाली पुणे पुलिस ने दावा किया था कि सम्मेलन माओवादियों से संबंध रखने वाले लोगों द्वारा आयोजित किया गया था। इसके बाद आठ जनवरी, 2018 को भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
बाद में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली, जिसमें एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को गिरफ्तार किया गया। अधिकांश आरोपी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
भाषा संतोष माधव
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