बागी अन्नाद्रमुक विधायकों को मंत्री बनाने पर वीसीके ने जताई आपत्ति, राजनीतिक नैतिकता पर उठाए सवाल

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बागी अन्नाद्रमुक विधायकों को मंत्री बनाने पर वीसीके ने जताई आपत्ति, राजनीतिक नैतिकता पर उठाए सवाल

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  • Publish Date - May 15, 2026 / 03:16 PM IST,
    Updated On - May 15, 2026 / 03:16 PM IST

चेन्नई, 15 मई (भाषा) विदुथलाई चिरुथाईगल काची (वीसीके) के महासचिव एवं सांसद डी रविकुमार ने शुक्रवार को ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के बागी विधायकों को विजय नीत तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार में मंत्री नियुक्त करने के विचार पर कड़ी आपत्ति जताई।

उन्होंने कहा कि यह कदम राजनीतिक और लोकतांत्रिक नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

रविकुमार ने तर्क दिया कि अन्नाद्रमुक के महासचिव के रूप में ई. के. पलानीसामी के पास पार्टी सचेतक (व्हिप) नियुक्त करने का पूरा अधिकार है और व्हिप के निर्देश पार्टी के सभी विधायकों पर बाध्यकारी होते हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि परिणामस्वरूप, पार्टी के निर्देशों के विपरीत सरकार के पक्ष में मतदान करने वाले 25 विधायक संविधान की ‘दसवीं अनुसूची’ (दलबदल विरोधी कानून) के तहत अयोग्य घोषित किए जाने संबंधी कार्यवाही के दायरे में आते हैं।

उन्होंने कहा, ‘भले ही वर्तमान में ऐसे विधायकों को मंत्री नियुक्त करने पर कोई संवैधानिक रोक न हो, लेकिन ऐसा करना राजनीतिक और नैतिक शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।’

उनकी यह टिप्पणी पलानीसामी के उस दावे के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि विरोधी अन्नाद्रमुक धड़े ने मंत्री पद के ‘लालच’ में शक्ति परीक्षण के दौरान सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार का समर्थन किया है। हालांकि, बागी नेताओं ने इस आरोप को खारिज किया है।

विधानसभा में दो विधायकों वाली वीसीके, वामपंथी दलों और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के साथ टीवीके सरकार को समर्थन दे रही है।

विधानसभा में 13 मई को विश्वासमत के लिए मतदान के दौरान अन्नाद्रमुक के 25 बागी विधायकों ने टीवीके सरकार के पक्ष में मतदान किया था। इसके चलते विधानसभा में टीवीके को कुल 144 विधायकों का समर्थन मिल गया और उसने 118 के बहुमत के आंकड़े को आसानी से पार कर लिया।

विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पलानीसामी ने विधायकों की खरीद-फरोख्त का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि विधायक दल को विभाजित करने का प्रयास करना अनुचित है।

रविकुमार ने अपने बयान में कहा कि यदि मुख्यमंत्री विजय इसके बावजूद उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल करना चाहते हैं, तो एकमात्र संवैधानिक और साफ-सुथरा तरीका यह होगा कि वे विधायक अपनी सीटों से इस्तीफा दें, औपचारिक रूप से टीवीके में शामिल हों और उपचुनावों के माध्यम से जनता से नया जनादेश प्राप्त करें।

सांसद ने कहा, ‘क्या जनता ऐसे दलबदल को स्वीकार करेगी और उन विधायकों को किसी अन्य पार्टी के बैनर तले दोबारा चुनेगी? यही एकमात्र तरीका ऐसी राजनीतिक प्रक्रिया की वैधता की परीक्षा लेगा।’

भाषा सुमित अविनाश

अविनाश