वेणुगोपाल ने मोहन भागवत के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर कुलपतियों की आलोचना की

वेणुगोपाल ने मोहन भागवत के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर कुलपतियों की आलोचना की

वेणुगोपाल ने मोहन भागवत के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर कुलपतियों की आलोचना की
Modified Date: June 15, 2026 / 12:36 pm IST
Published Date: June 15, 2026 12:36 pm IST

तिरुवनंतपुरम, 15 जून (भाषा) कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने केरल के विश्वविद्यालयों के तीन कुलपतियों के राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के एक कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर सोमवार को उन पर तीखा हमला बोला और उन पर राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र को आरएसएस के अनुरूप ढालने का प्रयास करने का आरोप लगाया।

केरल विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय और मलयालम विश्वविद्यालय के कुलपति शनिवार को तिरुवनंतपुरम में आयोजित आरएसएस के शताब्दी समारोह में शामिल हुए थे।

अलप्पुझा से सांसद वेणुगोपाल ने ‘फेसबुक’ पर एक पोस्ट में कहा कि केरल का उच्च शिक्षा क्षेत्र अपनी अकादमिक उत्कृष्टता, धर्मनिरपेक्ष सोच व लोकतांत्रिक चरित्र के लिए जाना जाता है लेकिन अब उसे आरएसएस के दायरे में लाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों से उच्च शिक्षा क्षेत्र को निष्पक्ष और धर्मनिरपेक्ष दिशा देने की उम्मीद की जाती है, वे ही आरएसएस के एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।

वेणुगोपाल ने कहा, “यह केरल के लिए शर्म की बात है कि ये तीनों कुलपति अब भी विश्वविद्यालयों का नेतृत्व कर रहे हैं।”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि तीनों कुलपतियों को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और अकादमिक निष्पक्षता का दिखावा करने के बजाय खुलकर आरएसएस से जुड़ जाना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस की विचारधारा से प्रभावित लोग प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों का नेतृत्व करने के योग्य नहीं हैं। वेणुगोपाल ने तीनों कुलपतियों से पद छोड़ने की मांग की।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कुलपति अपने पदों से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो उन्हें संविधानिक मूल्यों और धर्मनिरपेक्ष सोच में विश्वास रखने वाले लोगों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि समृद्ध शैक्षणिक विरासत वाले विश्वविद्यालयों का नेतृत्व करने के लिए आरएसएस नेताओं के प्रति निर्विवाद निष्ठा नहीं, बल्कि शैक्षणिक उत्कृष्टता, धर्मनिरपेक्ष मूल्यों, लोकतंत्र और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता आवश्यक है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य संविधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

भाषा जितेंद्र अमित

अमित


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