कोलकाता, 27 अगस्त (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने पिछले दुर्गा पूजा आयोजनों में ‘थीम’ के नाम पर देवी प्रतिमा की गरिमा से छेड़छाड़ करने का विरोध करते हुए आयोजकों से पांच दिवसीय उत्सव के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करने और धार्मिक पवित्रता बनाए रखने की अपील की है। संगठन के एक पदाधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
विहिप ने आयोजकों से पंडाल के भीतर मांसाहारी खाद्य पदार्थों के निषेध का कड़ाई से पालन किए जाने की अपील की।
विहिप के प्रदेश पदाधिकारी स्वरूप चटर्जी ने बताया कि संगठन ने बुधवार को सॉल्ट लेक स्थित पूर्वी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (ईजेडसीसी) में प्रमुख पूजा आयोजकों और पुरोहितों के साथ बैठक कर पारंपरिक रीति-रिवाजों के पालन के लिए कुछ दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने पूजा आयोजकों से दुर्गा पूजा की धार्मिक गरिमा और पवित्रता बनाए रखने तथा सनातनी परंपराओं का पालन करने का आग्रह किया। थीम के नाम पर देवी की प्रतिमाओं से छेड़छाड़ को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।’’
राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद यह इस प्रकार की पहली बैठक है।
उन्होंने कहा कि विहिप ने ऐसी पिछली थीम की कड़ी आलोचना की, जिनमें देवी की प्रतिमाओं को विधवा के रूप में दिखाया गया था या उनसे (गरिमा से) छेड़छाड़ की गयी थी तथा पंडालों की सजावट में जूते और टूटे हुए शीशों का इस्तेमाल किया गया था।
चटर्जी ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि देवी दुर्गा और यहां तक कि असुर की प्रतिमा भी शास्त्रों में दिए गए उनके मूल विवरण के अनुरूप होनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि पूजा पंडाल परिसर के अंदर मांसाहारी भोजन पर सख्त रोक लगाने का आग्रह किया गया है, जबकि पंडाल के बाहर या आसपास मांसाहारी भोजन की दुकानें लगाने पर कोई आपत्ति नहीं है।
उन्होंने बताया कि आयोजकों और श्रद्धालुओं से अधूरी प्रतिमाओं की तस्वीरें लेने से भी बचने को कहा गया है।
विहिप ने पारंपरिक नियमों के अनुसार पूजा संपन्न करने वाले पुरोहितों और समितियों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष गैर-नकद पुरस्कार देने की घोषणा भी की है।
फोरम फॉर दुर्गोत्सव के पदाधिकारी अंजन उकिल ने विहिप के सुझावों को स्वीकार करते हुए कहा कि अधिकतर पूजा समितियां पहले से ही समुचित रीति-रिवाजों का पालन करती हैं।
उन्होंने कहा कि विहिप की सिफारिशों को फोरम की बैठक में रखा जाएगा और उन पर चर्चा की जाएगी।
फोरम में कोलकाता और आसपास के इलाकों की 10,000 से अधिक पूजा समितियां शामिल हैं।
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राखी माधव
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