जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की जगह वीडियोग्राफी जासूसी के लिए नहीं: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता

जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की जगह वीडियोग्राफी जासूसी के लिए नहीं: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता

जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की जगह वीडियोग्राफी जासूसी के लिए नहीं: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता
Modified Date: July 20, 2026 / 08:20 pm IST
Published Date: July 20, 2026 8:20 pm IST

नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शन की वीडियो-रिकॉर्डिंग “जासूसी” के लिए नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के मकसद से की जा रही है।

वरिष्ठ विधि अधिकारी ने मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ को बताया कि जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों की हमेशा वीडियोग्राफी की जाती है।

पीठ जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष की ओर से केंद्र और दिल्ली पुलिस के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन के दौरान “लगातार, अंधाधुंध और दखल देने वाली निगरानी” का आरोप लगाया गया था।

उन्होंने कहा, “असल में, इस विरोध-प्रदर्शन में रोजाना सैकड़ों लोग वीडियो फिल्में और रील्स बनाते और उन्हें व्यापक रूप से प्रसारित करते हुए देखे जाते हैं।”

पीठ ने पीआईएल पर सुनवाई के लिए मंगलवार की तारीख तय की और मेहता से यह बताने को कहा कि क्या पुलिस ने विरोध-प्रदर्शनों के नियमन के लिए कोई दिशानिर्देश बनाए हैं, जैसा कि उच्चतम न्यायालय ने अपने एक फैसले में निर्देश दिया था।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ वकील नंदिता राव ने दलील दी कि अधिकारी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की “निजी ज़िंदगी में दखल देने वाली” निगरानी कर रहे हैं, जो कानून के हिसाब से सही नहीं है।

राव ने तर्क दिया कि सार्वजनिक जगहों पर भी किसी व्यक्ति का निजता का अधिकार खत्म नहीं होता है।

मेहता ने पीआईएल को सुर्खियों में आने का प्रयास बताया।

भाषा प्रशांत नरेश

नरेश


लेखक के बारे में