विजयन ने सरकार पर लगाए सरकारी कर्मचारियों के उत्पीड़न और राजनीतिक कारणों से तबादलों के आरोप

विजयन ने सरकार पर लगाए सरकारी कर्मचारियों के उत्पीड़न और राजनीतिक कारणों से तबादलों के आरोप

विजयन ने सरकार पर लगाए सरकारी कर्मचारियों के उत्पीड़न और राजनीतिक कारणों से तबादलों के आरोप
Modified Date: August 10, 2026 / 10:28 am IST
Published Date: August 10, 2026 10:28 am IST

तिरुवनंतपुरम, 10 अगस्त (भाषा) केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन ने सोमवार को आरोप लगाया कि राज्य में सरकारी कर्मचारी सरकार और सत्तारूढ़ गठबंधन से जुड़े संगठनों के ‘गलत कामों’ के कारण ‘भयावह स्थिति’ का सामना कर रहे हैं और यहां तक कि कुछ लोगों की जान भी जा रही है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता विजयन ने फेसबुक पोस्ट में कासरगोड कलेक्ट्रेट की वरिष्ठ लिपिक अशालता की मौत को ‘चौंकाने वाली’ घटना बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बाद अनिवार्य रूप से किए गए विभागीय तबादले से पैदा हुए मानसिक तनाव के कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली।

उन्होंने कन्नूर सरकारी मेडिकल कॉलेज की घटना का भी जिक्र किया, जहां वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ के वी राधामणि को कथित रूप से दिल का दौरा पड़ा था।

विजयन ने आरोप लगाया कि राजनीतिक उद्देश्य से तैयार किए गए कथित अवैध तबादला आदेश पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने के कारण गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) एसोसिएशन के नेताओं ने महिला चिकित्सक को मरीजों के सामने अपमानित किया।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को अपने संरक्षण में काम कर रहे ऐसे समूहों पर लगाम लगाना चाहिए।’’

विजयन ने आरोप लगाया कि बिना किसी नियम का पालन किए और केवल राजनीतिक कारणों से किए जा रहे बड़े पैमाने पर तबादलों से सरकारी व्यवस्था ठप हो गई है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह प्रथा सरकार के सत्ता में आने से पहले ही शुरू हो गई थी और अब भी लगातार जारी है। मुख्यमंत्री और अन्य लोग उन कर्मचारियों के खिलाफ धमकी भरा रवैया अपना रहे हैं, जो अवैध गतिविधियों में सहयोग करने से इनकार करते हैं।’’

विजयन ने मुख्यमंत्री के उस बयान कि, पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को लाभ नहीं दिया था, को पूरी तरह निराधार बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘एलडीएफ सरकार ने वित्तीय कठिनाइयों के बावजूद कर्मचारियों को समय पर लाभ देने के कदम उठाए थे और 12वें वेतन पुनरीक्षण आयोग की नियुक्ति कर वेतन संशोधन की प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार कर्मचारियों को यह कहकर धोखा दे रही है कि वेतन संशोधन केवल 10 साल में एक बार किया जाना चाहिए।’’

भाषा शोभना रंजन

रंजन


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