‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हिंसा: जांच के घेरे में प्रदर्शनकारियों के संदेश, ‘गोपनीय ऐप’

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‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हिंसा: जांच के घेरे में प्रदर्शनकारियों के संदेश, ‘गोपनीय ऐप’

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  • Publish Date - July 21, 2026 / 04:23 PM IST,
    Updated On - July 21, 2026 / 04:23 PM IST

नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) दिल्ली पुलिस द्वारा कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हिंसा की घटनाओं की जांच शुरू किए जाने के साथ प्रदर्शनकारियों के बीच कथित रूप से आदान-प्रदान किए गए कुछ संदेश सामने आए हैं।

इन संदेशों से संकेत मिलता है कि इंटरनेट के संभावित रूप से बंद रहने की स्थिति में संपर्क बनाए रखने की तैयारियां की गई थीं, जबकि कुछ अन्य संदेश इस मकसद के लिए जान तक देने की उनकी इच्छा की ओर इशारा करते हैं।

सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि जांच अधिकारी इन संदेशों की प्रामाणिकता और इनमें शामिल लोगों की पहचान का सत्यापन कर रहे हैं। इसके बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।

पुलिस के एक सूत्र ने बताया कि कुछ कथित संदेशों में इंटरनेट सेवाएं बाधित होने की स्थिति में संपर्क बनाए रखने का जिक्र है। इनमें मार्च के दौरान एक-दूसरे से जुड़े रहने और सूचनाओं के आदान-प्रदान के वैकल्पिक तरीकों पर चर्चा की गई है।

‘पीटीआई’ के पास उन समूह के संदेश हैं, जिनका आदान-प्रदान कथित तौर पर झड़पों के दौरान हुआ था। इन झड़पों में 118 पुलिसकर्मी और 70 प्रदर्शनकारी घायल हुए, जबकि 15 से 20 सरकारी वाहनों को क्षति पहुंची।

कथित संदेशों में से एक में लिखा है, ‘‘प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने के बाद आपके मोबाइल में नेटवर्क नहीं मिल सकता। पिछली बार भी पुलिस ने नेटवर्क जैमर का इस्तेमाल किया था और इस बार भी ऐसा कर सकती है। हालांकि, जिस समूह के साथ आप आए हैं, उसके संपर्क में बने रहना बेहद जरूरी है।’’

सूत्र ने बताया कि जांचकर्ताओं के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने ऐसे कुछ ऐप का भी सुझाव दिया था, जो ब्लूटूथ सिग्नल के जरिए काम कर सकते हैं। इन ऐप के लिंक भी उसी संवाद में साझा किए गए थे।

पुलिस इन ऐप की भी जांच कर रही है और उसका कहना है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

कथित संदेश में से एक में कहा गया है, ‘‘यह सुनिश्चित कर लें कि आपके समूह के सभी लोगों के मोबाइल में एक ही ऐप इंस्टॉल हो और प्रदर्शन स्थल में प्रवेश करने से पहले वे आपस में जुड़े हों।’’

सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान एकत्र किए गए सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन से लिए गए दृश्य, मोबाइल फोन के वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ-साथ इस डिजिटल सामग्री का भी विश्लेषण किया जा रहा है।

इन कथित संदेशों में राजनीतिक टिप्पणियां और लोगों को जुटने के आह्वान भी शामिल थे। एक संदेश में एक प्रतिभागी ने दावा किया कि ‘‘अगला दिन मोदी सरकार का आखिरी दिन होगा।’’

कुछ कथित संदेशों से यह भी संकेत मिलता है कि कुछ प्रतिभागी प्रदर्शन के दौरान आवश्यकता पड़ने पर अपनी जान तक कुर्बान करने के लिए तैयार थे।

कथित संदेश में कहा गया है, ‘‘देखो यार, जो लोग जान देने तक को तैयार हैं, वो यह सुन लें कि कम से कम तुम्हारा एहसान तो रहेगा आने वाली पीढ़ियों पर, आने वाले बच्चों के लिए।’’

एक संदेश में कहा गया, ‘‘भाई, अगर किसी की मौत होती है तो उसमें तो सरकार पर ज्यादा दबाव पड़ेगा।’’

जांच अधिकारी इन टिप्पणियों की पृष्ठभूमि की जांच कर रहे हैं। वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ये संदेश महज प्रतिभागियों के बीच व्यक्त किए गए व्यक्तिगत विचार थे या फिर प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं से जुड़े किसी सुनियोजित प्रयास का हिस्सा थे।

पुलिस के अनुसार, डिजिटल संवाद की फॉरेंसिक जांच जारी है। साइबर विशेषज्ञ संदेशों के स्रोत, उनके प्रसार और उनकी प्रामाणिकता का पता लगाने में जांचकर्ताओं की मदद कर रहे हैं।

सूत्र ने कहा, ‘‘हर संदेश को साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने से पहले उसका तकनीकी सत्यापन किया जा रहा है।’’

अधिकारी ने कहा कि जांच पूरी तरह साक्ष्यों पर आधारित है और आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के दौरान जुटाए गए ठोस साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

भाषा आशीष नरेश

नरेश