पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, डीजीपी के तबादले को लेकर भाजपा और विपक्षी दलों में वाकयुद्ध

पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, डीजीपी के तबादले को लेकर भाजपा और विपक्षी दलों में वाकयुद्ध

पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, डीजीपी के तबादले को लेकर भाजपा और विपक्षी दलों में वाकयुद्ध
Modified Date: March 16, 2026 / 02:51 pm IST
Published Date: March 16, 2026 2:51 pm IST

नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के तत्काल बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को स्थानांतरित करने के निर्वाचन आयोग के कदम को लेकर सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी दलों के बीच वाकयुद्ध शुरू हो गया।

विपक्षी दलों ने आयोग पर केंद्र में भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया, वहीं भाजपा ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का प्रयास कर रहा है।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संसद परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया कि जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में नहीं है, वहां अधिकारियों को दिया जाता है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘जब भी चुनाव होते हैं, और अगर राज्य सरकार दिल्ली में सत्तारूढ़ पार्टी की नहीं होती है, तो सबसे पहले वे डीजीपी और मुख्य सचिव को हटाते हैं। भाजपा नेताओं ने जानबूझकर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के साथ समन्वय करके इन अधिकारियों को हटा दिया होगा।’’

उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए यादव ने सवाल किया कि चुनाव के दौरान वहां इसी तरह की कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

यादव ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश में चुनाव के दौरान कभी भी डीजीपी को नहीं हटाया गया। चुनाव आयोग से कई शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। यहां तक ​​कि उन अधिकारियों को भी नहीं हटाया गया, जिनके परिवार के सदस्य चुनाव लड़ रहे थे।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है।

निर्वाचन आयोग ने रविवार को घोषणा की कि पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे। मतगणना 4 मई को होगी।

प्रदेश की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने भी आयोग के कदम की आलोचना की।

पार्टी सांसद सौगत रॉय ने इसे ‘‘गलत’’ और ‘पश्चिम बंगाल के खिलाफ एक कदम’ बताया।

तृणमूल सांसद कीर्ति आज़ाद ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ‘‘भाजपा की विस्तारित शाखा’’ के रूप में कार्य करता है।

तृणमूल की राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने दावा किया कि तड़के हुए तबादलों से पता चलता है कि आयोग पश्चिम बंगाल में निर्वाचित सरकार को नुकसान पहुंचाने के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह से निर्वाचन आयोग ने सुबह 4 बजे बंगाल के गृह सचिव और मुख्य सचिव का तबादला किया, उससे पता चलता है कि वह बंगाल में चुनी हुई सरकार को नुकसान पहुंचाने के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा है। हमने इस मामले को सदन में उठाया है और पूरे दिन संसद से वॉकआउट किया है।’

घोष ने यह आरोप भी लगाया कि राज्य में लगभग 50 लाख लोगों के नाम ‘विचाराधीन सूची’’ में हैं और उन्हें मतदान के अधिकार से वंचित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग घोर पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रहा है। यह काम नहीं करेगा और बंगाल की जनता इसका करारा जवाब देगी।’

विपक्ष पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने कहा कि संवैधानिक संस्थाएं भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं और उन्होंने विपक्षी दलों पर उन्हें कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा, ‘‘टीएमसी का पश्चिम बंगाल में कोई भविष्य नहीं है। वे जितना चाहे हो-हल्ला कर लें, लेकिन लोग बंगाल को बांग्लादेश नहीं बनने देंगे।’’

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने भी भारत की प्रतिष्ठा को कथित तौर पर धूमिल करने और लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर करने के लिए विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस की आलोचना की।

उन्होंने कहा, ‘यह पहली बार नहीं है कि चुनाव के दौरान अधिकारियों का तबादला किया गया है। निर्वाचन आयोग ने हमेशा जब भी आवश्यक समझा अधिकारियों को बदला है।’’

भाषा हक

हक अविनाश

अविनाश


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