(फाइल फोटो के साथ)
श्रीनगर, 29 सितंबर (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के लिए पद्म पुरस्कार का सुझाव सामने आने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में पार्टी को जीत दिलाने के लिए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए।
अब्दुल्ला ने यहां ‘क्रेता-विक्रता’ सम्मेलन से इतर संवाददाताओं से कहा, ‘‘पद्म भूषण? बस यहीं क्यों रुकना? उन्हें भारत रत्न दे दीजिए। राष्ट्रपति चुनाव में एक-दो साल बचे हैं? उन्हें राष्ट्रपति बना दीजिए। उन्होंने भाजपा के लिए इतना कुछ जो किया है। पश्चिम बंगाल भाजपा को तोहफ़े में दे दिया। अब, पद्म भूषण की बात करें तो मुझे लगता है कि यह उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय है।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्वाचन आयोग को आत्म-मंथन करना चाहिए क्योंकि आयोग पर लगे आरोप किसी राजनीतिक दल ने नहीं लगाए हैं।
उन्होंने कहा,‘‘ बिना किसी वजह के आज सभी विपक्षी दल चुनाव आयोग के खिलाफ नहीं हैं। सबूत किसी राजनीतिक दल ने पेश नहीं किए थे, ये सबूत एक अखबार की जांच से सामने आए हैं।’’
उन्होंने कहा कि इस विषय पर पर्दा डालने के बजाय, निर्वाचन आयोग को अपने कामकाज में सुधार करना चाहिए और यह पक्का करना चाहिए कि इस तरह के आरोप न लगें और ऐसी घटनाएं न हों।
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में 2029 के विधानसभा चुनाव के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘2029 अभी बहुत दूर है। पहले 2026, 27 और 28 तो बीत जाने दें, फिर 29 के बारे में बात करेंगे।’’
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि चीन के साथ भारत के रिश्तों में सुधार के बारे में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की बात गलत नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘जयशंकर साहब गलत नहीं हैं। गलवान के बाद रिश्ते किस हाल में थे? वे कहीं नज़र ही नहीं आ रहे थे। लोगों से कहा जा रहा था कि वे अपने घरों की बालकनी से चीनी टीवी फेंक दें। आज कम से कम हम न सिर्फ एक-दूसरे से मिल रहे हैं, बल्कि अच्छी बातचीत भी कर रहे हैं। और ऐसा ही होना चाहिए।’’
अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी पार्टी ने हमेशा पड़ोसी देशों और अन्य देशों के साथ बेहतर रिश्तों का समर्थन किया है, क्योंकि यह भारत के लिए अच्छा है।
किसी भी देश के साथ अच्छे रिश्तों के फ़ायदों पर ज़ोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमारे पड़ोस में कई ऐसे देश हैं जिनके साथ हमारे रिश्ते बहुत अच्छे नहीं हैं। बांग्लादेश को ही देख लीजिए।’’
बिना नाम लिये उन्होंने कहा कि ‘अन्य देश भी हैं।’
भाषा
राजकुमार नरेश
नरेश