प.बंगाल: अभिषेक बनर्जी के कार्यालय वाली दो मंजिलें खाली करने का अग्निशमन विभाग का अदालत ने रद्द किया

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प.बंगाल: अभिषेक बनर्जी के कार्यालय वाली दो मंजिलें खाली करने का अग्निशमन विभाग का अदालत ने रद्द किया

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  • Publish Date - September 16, 2026 / 12:49 PM IST,
    Updated On - September 16, 2026 / 12:49 PM IST

कोलकाता, 16 सितंबर (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बुधवार को पश्चिम बंगाल अग्निशमन सेवा विभाग के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें यहां कैमक स्ट्रीट स्थित एक ऊंची इमारत की छठी और सातवीं मंजिल खाली करने का निर्देश दिया गया था, इन मंजिलों पर तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी का कार्यालय है।

अदालत ने अग्निशमन विभाग को निर्देश दिया कि वह तीन सितंबर को तृणमूल कांग्रेस द्वारा दिए गए जवाब पर दोबारा विचार करे और याचिकाकर्ता को नोटिस जारी करने के बाद परिसर का फिर से निरीक्षण करे।

न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने विभाग के चार सितंबर के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें दक्षिण कोलकाता के पॉश इलाके में स्थित इस इमारत की छठी और सातवीं मंजिल खाली करने को कहा गया था।

अदालत ने निर्देश दिया कि यदि दोबारा निरीक्षण के दौरान इन दोनों मंजिलों पर अग्नि सुरक्षा व्यवस्था में कोई और कमी पाई जाती है, तो अधिकारी तृणमूल को इसकी जानकारी देकर सुधारात्मक कदम उठाने के लिए कहें।

न्यायमूर्ति राव ने कहा कि यदि नोटिस जारी किए जाने के बाद भी याचिकाकर्ता अग्नि सुरक्षा उपायों को लागू करने में विफल रहता है, तो विभाग कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।

इससे पहले 11 सितंबर को उच्च न्यायालय ने अग्निशमन सेवा विभाग को निर्देश दिया था कि अंतिम आदेश आने तक वह दोनों मंजिलें खाली करने के अपने आदेश को लागू न करे।

विभाग के आदेश को चुनौती देते हुए सुनवाई के दौरान तृणमूल के वकील ने कहा था कि पार्टी को चार सितंबर को दोनों मंजिलें खाली करने का नोटिस दिया गया था। इसका आधार यह बताया गया था कि वहां का अग्नि सुरक्षा प्रमाणन समाप्त हो चुका था।

याचिका का विरोध करते हुए राज्य के महाधिवक्ता सुरोजित नाथ मित्रा ने अदालत में दलील दी थी कि छठी और सातवीं मंजिल पर अग्नि सुरक्षा के कई मानकों का उल्लंघन किया गया था। उन्होंने यह भी कहा था कि इनमें से एक मंजिल पर कई एलपीजी गैस सिलेंडर रखे गए थे।

इससे पहले अगस्त में अधिकारियों ने इसी इमारत से तृणमूल का एक ‘अवैध’ होर्डिंग हटाया था। उस दौरान बनर्जी के कार्यालय के निजी गार्ड, उनके समर्थकों और पार्टी के कुछ नेताओं की पुलिस तथा कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों के साथ झड़प हुई थी।

भाषा शोभना मनीषा

मनीषा