कोलकाता, छह मई (भाषा) कोलकाता के मध्य में स्थित लगभग 250 साल पुरानी राइटर्स बिल्डिंग पश्चिम बंगाल के राज्य सचिवालय के रूप में अपना दर्जा वापस पाने को पूरी तरह तैयार दिख रही है, क्योंकि भाजपा ने फैसला किया है कि उसका मुख्यमंत्री ‘नबन्ना’ से काम नहीं करेगा जो ममता बनर्जी प्रशासन का केंद्र था।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को कहा कि ब्रिटिश काल के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा सशस्त्र हमले और मुख्य रूप से कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के मुख्यमंत्रियों द्वारा शासन का गवाह रहे राइटर्स बिल्डिंग को राज्य सचिवालय के रूप में उसका पूर्व का दर्जा स्थायी रूप से वापस मिल जाएगा।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस 2011 में राज्य में सत्ता में आई और मुख्यमंत्री कार्यालय कुछ समय के लिए राइटर्स बिल्डिंग में रहा। दो साल बाद मुख्यमंत्री कार्यालय हावड़ा के शिवपुर स्थित 14 मंजिला नई इमारत ‘नबन्ना’ में स्थानांतरित हो गया। नबन्ना का निर्माण हुगली नदी पुल आयुक्तों की एक परियोजना के लिए किया गया था।
अधिकारी ने बताया कि राइटर्स बिल्डिंग में बचा हुआ मरम्मत कार्य पूरा होने तक, नये मुख्यमंत्री के पश्चिम बंगाल विधानसभा के विस्तार भवन से कार्य करने की संभावना है।
अधिकारी ने कहा, ‘राइटर्स बिल्डिंग में काम पूरा होने से पहले, नये मुख्यमंत्री को विधानसभा के विस्तार भवन से अस्थायी रूप से कार्य करने देने का प्रस्ताव है।’
उन्होंने हालांकि, कहा कि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
मुख्य सचिव दुशमंता नरियाल ने विधानसभा सचिव समरेंद्र नाथ दास के साथ प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए एक आपातकालीन बैठक की।
विधानसभा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमें विस्तार भवन को तैयार रखने और सुरक्षा एवं अन्य पहलुओं के मद्देनजर सभी बुनियादी ढांचागत मुद्दों को ध्यान रखने के लिए कहा गया है। भवन को तैयार रखना होगा।”
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा, “हमने 2021 में कहा था कि हमारी सरकार के सत्ता में आते ही हम राइटर्स बिल्डिंग से सरकार चलाएंगे।”
भाषा
अमित माधव
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