चेन्नई, पांच मई (भाषा) तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) विजयी होकर उभरी है और उसने दो प्रमुख द्रविड़ पार्टियों द्रमुक और अन्नाद्रमुक के लगभग छह दशकों से चले आ रहे वर्चस्व को समाप्त कर दिया।
अपने पहले ही चुनावी मुकाबले में जीत हासिल करने के बाद टीवीके का दर्जा बढ़कर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का हो गया। हालांकि, विजय नीत टीवीके को इतना जनादेश नहीं मिला कि वह अकेले दम पर पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना सके। बहुमत जुटाने के लिए उसे 10 और सीटों की ज़रूरत है।
राज्य में साधारण बहुमत हासिल करने के लिए किसी भी राजनीतिक दल को कुल 234 निर्वाचन क्षेत्रों में से कम से कम 118 में जीत हासिल करनी होगी। हालांकि, टीवीके ने 108 निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की।
टीवीके नेता विजय ने उन दोनों सीटों पर जीत हासिल की, जहां से उन्होंने चुनाव लड़ा था—चेन्नई की पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली पूर्व। निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, उन्हें इन दोनों सीटों में से किसी एक से इस्तीफा देना होगा। टीवीके सूत्रों के मुताबिक, उनके तिरुचिरापल्ली सीट छोड़ने की संभावना है।
अगर विजय ऐसा करते हैं, तो पार्टी की कुल सीटों की संख्या एक कम हो कर 107 हो जाएगी। इन आंकड़ों के खेल में एक और बात यह है कि टीवीके द्वारा नियुक्त विधानसभा अध्यक्ष विश्वास प्रस्ताव के दौरान वोट डालने के हकदार नहीं होंगे, और इस तरह पार्टी की प्रभावी मतदान क्षमता 106 रह जाएगी।
इसलिए, टीवीके को अपना बहुमत साबित करने के लिए 12 और विधायकों के समर्थन की ज़रूरत है। द्रमुक गठबंधन में, कांग्रेस ने पांच सीटें जीती हैं, दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों ने दो-दो सीटें (कुल चार) जीती हैं, जबकि डीएमडीके ने एक सीट, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और वीसीके ने दो-दो सीटें जीती हैं।
अन्नाद्रमुक गठबंधन में पीएमके ने चार सीटें हासिल की हैं, भाजपा ने एक सीट जीती है। एएमकेके को भी एक सीट मिली है।
अगर टीवीके को दोनों गठबंधनों में शामिल अन्य पार्टियों का समर्थन मिल जाता है, तो उसे 21 अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं।
टीवीके को कुल 129 सीटें (108 + 21) मिल सकती हैं। हालांकि, टीवीके को उन सभी दलों के समर्थन की ज़रूरत नहीं है, और सिर्फ़ 12 सदस्यों का समर्थन ही काफ़ी होगा।
विजय के बुधवार (छह मई) को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करने की उम्मीद है।
भाषा तान्या अविनाश
अविनाश