आखिर घायलों की समय पर मदद क्यों नहीं की जाती : आईयूएमएल सदस्य ने रास में पूछा सवाल

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आखिर घायलों की समय पर मदद क्यों नहीं की जाती : आईयूएमएल सदस्य ने रास में पूछा सवाल

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  • Publish Date - February 12, 2026 / 02:52 PM IST,
    Updated On - February 12, 2026 / 02:52 PM IST

नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) देश में हर दिन दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों में से कई की समय पर उपचार न मिलने से मौत होने पर चिंता जताते हुए राज्यसभा में एक सांसद ने बृहस्पतिवार को कहा कि बढ़ती असंवेदनशीलता सभ्य समाज के माथे पर एक धब्बा है।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के हारिस बीरन ने उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा ‘‘असंवेदनशीलता की यह स्थिति है कि गोवा में सड़क हादसे में घायल एक युवक की मौत होने के बाद, उसकी मदद के लिए गए पुलिसकर्मी पर पीड़ित का सामान गायब करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है।’’

उन्होंने कहा कि घायल व्यक्ति को समय पर उपचार मुहैया कराना, उसे अस्पताल पहुंचाना सर्वाधिक जरूरी होता है। उन्होंने कहा ‘‘आखिर घायलों की समय पर मदद क्यों नहीं की जाती ।’’

बीरन ने कहा कि हर दिन देश में करीब 1500 दुर्घटनाएं होती हैं और सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, हादसों में हर दिन करीब 460 लोगों की जान जाती है।

उन्होंने कहा कि सड़कों पर जगह जगह विज्ञापनों के फ्लेक्स बोर्ड लगे होते हैं जिनके आसपास हादसे होने की आशंका अधिक होती है। उन्होंने कहा कि केरल उच्च न्यायालय ने इन पर प्रतिबंध लगा दिया है।

बीरन ने कहा कि दुर्घटना में घायल कई लोग अस्पतालों की कमी की वजह से नहीं, बल्कि समय पर उपचार नहीं मिल पाने की वजह से जान गंवाते हैं। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद के कुछ मिनट ‘‘गोल्डन टाइम’’ होते हैं जब उपचार मिल जाए तो घायल की जान बच सकती है।

उन्होंने कहा कि एंबुलेंस बुलाने में भी समय लगता है और जब तक एंबुलेंस आती है, देर हो चुकी होती है।

बीरन ने मांग की कि सरकार को ऐसे नियम बनाने चाहिए कि घायल को अस्पताल ले कर जाने पर शुरुआती 48 घंटे तक केवल उसका उपचार किया जाए, कोई कानूनी औपचारिकता पूरी करने की बात इन 48 घंटे के बाद हो। साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की मदद को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से जागरुकता अभियान भी चलाया जाना चाहिए।

कांग्रेस की रंजीत रंजन ने कहा कि दिल्ली में महिला शिक्षिकाओं की भर्ती के लिए पात्रता की आयु सीमा में बदलाव के फैसले ने उनके लिए परेशानी उत्पन्न कर दी है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक यानी टीजीटी के लिए अधिकतम आयु सीमा को घटा कर 30 साल कर दिया गया।

रंजन ने कहा कि यह पक्षपातपूर्ण फैसला है और इसे वापस लिया जाना चाहिए।

बीजू जनता दल के देवाशीष सामंतराय ने ओडिशा के कटक स्थित रेवनशॉ विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में कई विश्वविद्यालय हैं लेकिन ओडिशा में एक हर ऐसा विश्वविद्यालय है।

उन्होंने कहा ‘‘ओडिशा बड़ा राज्य है और हमारे युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए और केंद्रीय विश्वविद्यालय चाहिए। फिलहाल कटक स्थित रेवनशॉ विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने से संस्थान को अधिक सुविधाएं मिल जाएंगी और यह छात्रों के हित में होगा।’’

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के मेदा रघुनाथ रेड्डी ने मछुआरों का मुद्दा उठाया।

भाषा

मनीषा माधव

माधव