महज वैवाहिक विवाद के आधार पर पत्नी खुदकुशी के लिए उकसाने की जिम्मेदार नहीं

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महज वैवाहिक विवाद के आधार पर पत्नी खुदकुशी के लिए उकसाने की जिम्मेदार नहीं

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  • Publish Date - April 8, 2026 / 09:49 PM IST,
    Updated On - April 8, 2026 / 09:49 PM IST

प्रयागराज, आठ अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि एक पत्नी और उसके रिश्तेदारों को पति को खुदकुशी के लिए उकसाने का महज इसलिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि उन्होंने वैवाहिक विवाद को लेकर उसके खिलाफ मामला दायर किया था।

न्यायमूर्ति समीर जैन ने मेघा कीर्ति की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि भले ही वह मामला कथित तौर पर झूठा हो, भादंसं की धारा 306 (खुदकुशी के लिए उकसाने) के तहत अपराध तय करने के लिए आवश्यक दोषपूर्ण इरादे को साबित नहीं करता।

उच्च न्यायालय ने मेघा और उसके परिजनों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह साबित होता हो कि मेघा के पति को खुदकुशी के लिए उकसाया गया।

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि मान भी लें कि ‘झूठे’ मामलों की वजह से संबंधित व्यक्ति तनाव में था तो भी यह नहीं कहा जा सकता कि उसके पास आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

पत्नी और उसके परिजनों ने पति की आत्महत्या के संबंध में सहारनपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित मुकदमे और आरोपपत्र को रद्द करने की मांग करते हुए यह याचिका दायर की थी।

मेघा के ससुर ने अगस्त, 2022 में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उसकी बहू पैतृक संपत्ति में हिस्सा लेने के लिए उनके बेटे पर दबाव बना रही थी और जब उसने हिस्सा देने से मना कर दिया तो बहू और उसके रिश्तेदारों ने उनके बेटे का कथित तौर पर उत्पीड़न किया और उसके खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया।

प्राथमिकी में यह दावा भी किया गया कि संबंधित (जान गंवाने वाले) व्यक्ति को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी और लंबित मुकदमे के चलते वह अत्यधिक तनाव में था और जुलाई, 2022 में अंततः उसने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।

जांच के दौरान, पुलिस ने एक कथित सुसाइड नोट बरामद किया जिसमें कहा गया था कि पत्नी और उसके रिश्तेदारों के उत्पीड़न की वजह से मृतक पिछले दो वर्षों से भारी तनाव में था और वह आत्महत्या को मजबूर हुआ।

जांच के बाद पत्नी और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ भादंसं की धारा 306 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया जिसे अदालत ने संज्ञान में लिया और याचिकाकर्ताओं को समन जारी किया।

पत्नी के वकील ने दलील दी कि यदि पत्नी द्वारा दर्ज कराए गए मामले की वजह से पति ने खुदकुशी की, तो भी पत्नी और उसके परिजनों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही धारा 306 के तहत अपराध साबित करने के लिए यह दर्शाया जाना आवश्यक है कि उस व्यक्ति के पास खुदकुशी करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा था।

न्यायमूर्ति जैन ने छह अप्रैल को पारित निर्णय में कहा कि यद्यपि जान गंवाने वाले व्यक्ति अपनी पत्नी द्वारा दर्ज कराए गए मामले की वजह से मुकदमे का सामना कर रहा था और उनके बीच वैवाहिक संबंध सौहार्दपूर्ण नहीं थे, प्रथम दृष्टया यह नहीं कहा जा सकता कि याचिकाकर्ताओं द्वारा दर्ज कराए गए मामलों के परिणाम स्वरूप पति ने आत्महत्या की।

भाषा सं राजेंद्र राजकुमार

राजकुमार