नयी दिल्ली, 26 अप्रैल (भाषा) एक जटिल चिकित्सीय प्रक्रिया और मानवीय उदारता की वजह से एक महिला को तब नयी जिंदगी मिली जब दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल ने सफलतापूर्वक उसके दोनों हाथों का प्रत्यारोपण (बाइलैटरल हैंड ट्रांसप्लांट) किया। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि दो बच्चों की मां इस महिला ने चारा काटने वाली मशीन से हुए एक हादसे में अपने दोनों हाथ गंवा दिए थे।
अस्पताल द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि यह इस संस्थान में किया गया दूसरा ऐसा हाथों का प्रत्यारोपण है।
बयान के अनुसार, हादसे के बाद दैनिक कार्यों के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो चुकी इस महिला को उपयुक्त अंग दानकर्ता के मिलने के बाद दोबारा बिना किसी पर आश्रित हुए जीने का अवसर मिला।
करीब 12 घंटे चली इस सर्जरी में दाता के दोनों ऊपरी अंगों का प्रत्यारोपण किया गया-दायां हाथ कोहनी के ऊपर (सुप्राकॉन्डिलर स्तर) और बायां हाथ कलाई के पास (डिस्टल फोरआर्म स्तर) लगाया गया।
चिकित्सकों ने सूक्ष्म शल्य तकनीकों के तहत हड्डी को जोड़ना, टेंडन की मरम्मत, रक्त वाहिकाओं का संलयन और नसों का संयोजन जैसे जटिल चरण पूरे किए, जिससे रक्त संचार और गति बहाल हो सके।
प्लास्टिक, कॉस्मेटिक और हैंड माइक्रोसर्जरी विभाग के अध्यक्ष महेश मंगल ने कहा, “ दोनों हाथों का यह सफल प्रत्यारोपण विभाग और अस्पताल के लिए गर्व का विषय है। ऐसे ऑपरेशन पुनर्निर्माणात्मक माइक्रोसर्जरी की उच्चतम उपलब्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन मरीजों को नयी जिंदगी देते हैं जिन्होंने अपने दोनों अंग और स्वतंत्रता खो दी है।”
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अनुभव गुप्ता ने कहा, “ दोनों हाथों का प्रत्यारोपण केवल सर्जरी नहीं, बल्कि एक बेहद समन्वित प्रक्रिया है, जिसमें हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। हमारा उद्देश्य केवल शरीर की संरचना बहाल करना नहीं, बल्कि मरीज को गरिमा और कार्यक्षमता लौटाना था।”
अस्पताल के एक अन्य वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. भीम नंदा ने बताया कि इस प्रक्रिया में इस्केमिया के दौरान ऊतकों की जीवंतता बनाए रखना और रक्त प्रवाह बहाल करने से पहले कंकाल की स्थिरता सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण था।
अस्पताल ने बताया कि यह प्रत्यारोपण प्लास्टिक सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, एनेस्थीसिया, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, मनोचिकित्सा, पैथोलॉजी, जेनेटिक्स, फिजियोथेरेपी, गहन चिकित्सा और प्रशासन सहित विभिन्न विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम द्वारा किया गया।
अस्पताल ने दानदाता और उसके परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके इस निर्णय ने मरीज को नयी उम्मीद और जीवन का नया अवसर दिया है।
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