dhirendra shastri/ image source: BhimArmyChief x handle
Dhirendra Shastri on Chhatrapati Shivaji: नागपुर: धार्मिक कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर बाबा) के एक बयान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर दावा किया कि “छत्रपति शिवाजी महाराज लगातार लड़ाइयों से थक गए थे और समर्थ रामदास स्वामी के पास गए। उन्होंने अपना मुकुट उतारकर संत के चरणों में रख दिया और उनसे राज्य का शासन संभालने का आग्रह किया।” इसके साथ ही उन्होंने हिंदुओं को चार बच्चे पैदा करने की सलाह दी और कहा कि उनमें से एक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को समर्पित करना चाहिए। इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई।
परम प्रतापी योद्धा, अद्भुत साहस, दूरदर्शी रणनीति और जनकल्याणकारी शासन के प्रतीक, बहुजन प्रतिपालक राजाधिराज छत्रपति शिवाजी महाराज के संबंध में यह कहना कि वे युद्धों से थककर अपना मुकुट किसी और को सौंपना चाहते थे, न केवल ऐतिहासिक रूप से असत्य है, बल्कि उनके अदम्य साहस और स्वाभिमान… pic.twitter.com/lmUeRAW6KS
— Chandra Shekhar Aazad (@BhimArmyChief) April 26, 2026
विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सफाई देते हुए कहा, “हम परसों यहां आए थे। हमें भारत दुर्गा माता मंदिर के भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होने का सौभाग्य मिला, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यक्रम था। कल से कुछ लोग सोशल मीडिया पर हमारे बयान को अलग तरीके से पेश कर रहे हैं… हमें इसका बहुत दुख और खेद है… इस देश में आज जो भी सनातनी जिंदा हैं, अगर वे हिंदुत्व के प्रति प्रतिबद्ध हैं, तो उसका सबसे बड़ा श्रेय छत्रपति वीर शिवाजी महाराज को जाता है। हमें दुख है कि जो लोग छत्रपति वीर शिवाजी का सम्मान करते हैं, वे हमारे ही अपने लोग हैं। हम भी छत्रपति शिवाजी को मानते हैं और वे भी मानते हैं। अगर हम आपस में ही लड़ेंगे, तो दूसरों को मौका मिल जाएगा… अगर किसी को हमारी बात से ठेस पहुंची है, तो हम दिल से क्षमा चाहते हैं। हम यह भी निवेदन करते हैं कि हमारे शब्दों को गलत तरीके से प्रस्तुत न किया जाए। क्योंकि हम छत्रपति शिवाजी के लिए जीते हैं और उन्हीं के लिए मरते हैं। हमारा जीवन भी उनके स्वराज की स्थापना के लिए है और हिंदू राष्ट्र की जो विचारधारा हमने ली है, वह भी हमने उन्हीं से ली है…”
#WATCH | Nagpur, Maharashtra: On his remarks on Chhatrapati Shivaji Maharaj, Bageshwar Dham Peethadhish Dhirendra Krishna Shastri says, “We arrived the day before yesterday. We had the privilege of attending the groundbreaking ceremony at the Bharat Durga Mata Temple, a Rashtriya… pic.twitter.com/LOC02FiNGU
— ANI (@ANI) April 26, 2026
इसके साथ ही उन्होंने आस्था और अंधविश्वास पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “आस्था और अंधविश्वास के बीच बहुत बारीक फर्क होता है—यह कोई बड़ा अंतर नहीं है। समझ के साथ किया गया विश्वास आस्था है, जबकि बिना समझ के किया गया विश्वास अंधविश्वास है। हम कभी नहीं कहते कि लोग हमारी पूजा करें। हर सभा और कथा में हम साफ कहते हैं कि हम लोगों को अपने से नहीं, बल्कि भगवान बालाजी हनुमान से जोड़ने आए हैं। अगर भगवान हनुमान की भक्ति के लिए प्रेरित करना, हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए कहना या हनुमान मंदिर जाने के लिए प्रेरित करना अंधविश्वास है, तो इस देश के सभी धर्मों को अंधविश्वास माना जाएगा।”
#WATCH | Nagpur, Maharashtra: Bageshwar Dham Peethadhish Dhirendra Krishna Shastri says, “There is a very fine line between faith and superstition—it’s not a big gap. Trust based on understanding is faith, while trust without understanding is superstition. We never say that… pic.twitter.com/9xnZKE8x6N
— ANI (@ANI) April 26, 2026