जंतर-मंतर पर महिलाओं की नयी जंग: शौचालय और पानी के लिए संघर्ष

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जंतर-मंतर पर महिलाओं की नयी जंग: शौचालय और पानी के लिए संघर्ष

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  • Publish Date - July 25, 2026 / 02:26 PM IST,
    Updated On - July 25, 2026 / 02:26 PM IST

(वर्षा सागी)

नयी दिल्ली, 25 जुलाई (भाषा) दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन में डटी कई महिलाओं के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती तपती धूप में घंटों बैठना या भारी भीड़ के बीच रहना नहीं, बल्कि साफ-सुथरा और आसानी से उपलब्ध शौचालय ढूंढ़ना है।

प्रदर्शन स्थल पर पानी की आपूर्ति बंद होने और आसपास के शौचालयों तक पहुंच लगातार मुश्किल होती जाने के कारण महिला प्रदर्शनकारियों और स्वयंसेवी चिकित्सकों का कहना है कि बुनियादी स्वच्छता संबंधी जरूरतें पूरी करना भी रोज की जद्दोजहद बन गया है। इससे कुछ महिलाओं को मजबूर होकर प्रदर्शन स्थल छोड़ना पड़ रहा है और चिकित्सा सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।

बेंगलुरु से आई प्रदर्शनकारी हरिश्मा ने कहा कि शौचालय तक पहुंचना प्रदर्शन में बने रहने की सबसे बड़ी मुश्किलों में से एक है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह बहुत कठिन है। खासकर एक महिला होने के नाते मुझे शौचालय जाने के लिए अपने हॉस्टल वापस लौटना पड़ता है।’’ उन्होंने बताया कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लंबे समय तक प्रदर्शन स्थल पर बने रहना बेहद मुश्किल हो गया है।

कई दिनों से प्रदर्शन स्थल पर तैनात एक स्वयंसेवी महिला डॉक्टर ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, ‘‘जंतर-मंतर पर शुरू से ही पानी की आपूर्ति बंद है। प्रदर्शन के पहले ही दिन मुझे मासिक धर्म शुरू हो गया था और मुझे शौचालय का इस्तेमाल करना पड़ा। वह अनुभव बेहद खराब था।’’

डॉक्टर ने बताया कि स्वयंसेवकों के सामने भोजन की व्यवस्था भी एक बड़ी समस्या बन गई है।

उन्होंने कहा, ‘‘लोगों ने हमारे लिए जो खाना भेजा है, वह भी हमें नहीं मिल पा रहा है। डिलीवरी करने वाला व्यक्ति यहां तक नहीं पहुंच पा रहा। मेरा साथी भी हमारे लिए खाना नहीं ला पा रहा क्योंकि सुरक्षा जांच बहुत सख्त है और लोगों को प्रदर्शन स्थल तक आने नहीं दिया जा रहा।’’

स्वयंसेवी डॉक्टरों ने बताया कि पहले वे पैदल जनपथ मेट्रो स्टेशन तक जाकर प्रदर्शन क्षेत्र से बाहर स्थित किसी रेस्तरां के शौचालय का इस्तेमाल कर लेते थे।

वहीं, एक अन्य स्वयंसेवी चिकित्सक ने कहा, ‘‘हम डॉक्टर पैदल जनपथ मेट्रो तक जाते थे और वहां किसी रेस्तरां का शौचालय इस्तेमाल कर लेते थे। लेकिन अब आसपास की दुकानें शाम को बंद कर दी गई हैं। अब जब हमारे डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ को शौचालय जाना होता है तो हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचता। हमने एक होटल से कमरा बुक करने की भी बात कही ताकि शौचालय का इस्तेमाल कर सकें, लेकिन उन्होंने भी मना कर दिया।’’

सुविधाओं की कमी का असर उन मेडिकल शिविरों पर भी पड़ा है, जहां निर्जलीकरण, थकावट, चोट और मामूली घावों से जूझ रहे प्रदर्शनकारियों का इलाज किया जा रहा है।

वहीं, एक अन्य स्वयंसेवी डॉक्टर ने कहा, ‘‘मेडिकल स्टाफ कई तरह की परेशानियों का सामना कर रहा है। हर बार जब किसी को शौचालय जाना पड़ता है तो उसे मेडिकल शिविर बिना किसी देखरेख के छोड़ना पड़ता है, भारी भीड़ के बीच से निकलना पड़ता है और फिर करीब दो किलोमीटर दूर स्थित सबसे नजदीकी गुरुद्वारे तक पैदल जाना पड़ता है।’’

स्वयंसेवकों ने बताया कि गुरुद्वारा उन कुछ स्थानों में से एक है, जहां प्रदर्शनकारी शौचालय का उपयोग कर पा रहे हैं। हालांकि इतनी दूरी होने के कारण बार-बार वहां जाना संभव नहीं है, खासकर उन मेडिकल टीमों के लिए जिन्हें आपात स्थिति में तुरंत उपलब्ध रहना पड़ता है।

कुछ स्वयंसेवकों ने बताया कि वे प्रदर्शन स्थल के पास अस्थायी शौचालय लगाने की संभावना तलाश रहे हैं, लेकिन इसके लिए आवश्यक अनुमति हासिल करना आसान नहीं है।

महिला प्रदर्शनकारियों ने प्रदर्शन स्थल पर मौजूद शौचालयों की स्थिति पर भी नाराजगी जताई।

वहीं, एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘‘जब हम यहां आए थे, तभी से तेज बदबू आ रही थी। अब तो हालात और भी खराब हो गए हैं। यह बिलकुल असहनीय है।’’

अन्य स्वयंसेवक ने आरोप लगाया कि नगर निगम के सफाई कर्मचारी नियमित रूप से प्रदर्शन स्थल के भीतर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में प्रदर्शनकारियों को ही अपनी ओर से जितना संभव हो, सफाई करनी पड़ रही है।

डॉक्टरों का कहना है कि यह केवल सुविधा का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य का भी गंभीर मुद्दा है।

देश के विभिन्न हिस्सों से प्रदर्शनकारियों के नए-नए जत्थे लगातार जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। ऐसे में महिला प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब साफ शौचालय और पानी की उपलब्धता भी उतना ही बड़ा मुद्दा बन गई है, जितना वह उद्देश्य जिसके लिए वे जंतर-मंतर पहुंची हैं।

भाषा गोला नेत्रपाल

नेत्रपाल