नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) साठ से अधिक महिला संगठनों ने सांसदों से आग्रह किया है कि वे महिलाओं के लिए आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जुड़ी शर्तों से अलग स्वतंत्र रूप से लागू करें।
पांच सौ से अधिक हस्ताक्षरकर्ताओं के प्रतिवेदन में प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 की आलोचना करते हुए कहा गया है कि इसमें महिलाओं के आरक्षण को जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से ‘‘गलत तरीके से जोड़ा गया है।’’
इसमें तर्क दिया गया है कि विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का मौजूदा प्रावधान (जिसे 2023 में अधिनियमित किया गया था) को नए जनसंख्या आंकड़ों के बिना तुरंत लागू किया जा सकता है।
इसमें कहा गया है, ‘‘यदि सरकार महिलाओं के आरक्षण को जनगणना से जोड़ने के लिए दृढ़ संकल्पित है तो उसे महिलाओं की जनसांख्यिकीय हिस्सेदारी को दर्शाते हुए 48-49 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना चाहिए।’’
हस्ताक्षरकर्ताओं ने संसद से आग्रह किया कि वह ‘विशेष सत्र’ का उपयोग सीट में वृद्धि या परिसीमन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए न करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे कार्य जनसंख्या के आंकड़ों से जुड़े होते हैं और इन्हें केवल वर्तमान में जारी जनगणना के पूरा होने के बाद ही किया जाना चाहिए।
प्रतिवेदन में कहा गया है, ‘‘इस विशेष सत्र का उपयोग महिलाओं के आरक्षण से ध्यान भटकाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।’’
हस्ताक्षरकर्ताओं ने अपनी प्रमुख मांगों में से एक के रूप में 2023 के कानून से जनगणना और परिसीमन के सभी संदर्भों को हटाने की मांग की।
भाषा शुभम शफीक
शफीक